"होली" - 'तेरी छटा निराली'
हर हाथ में गुलाल, हर चेहरे पर गुलाल।
स्वर्णिम रंगों से भारत भूमि हुई निहाल।।
हर स्वर सजे रंगमय गीतों की मृदुल धार।
आओ मनायें मिलकर होली का त्यौहार।।
खेलें होली, राधा कृष्ण का लेकर मन में प्यार।
होली के बहाने होता मधुर भावों का इजहार।।
गोरी भी करती हंस हंस के सब पर पलटवार।
उड़ाये गुलाल मार पिचकारी की तीखी धार।।
बासन्ती रंग चढ़ा चेहरे पर आया निखार।
कमनियता उच्छृंखल हुई हटा लज्जा का भार।।
सौन्दर्य पर भारी है सुनहरे रंगों का श्रृंगार।
होली तुझमे बसा है मधुर प्रेम का व्यवहार।।
चढ़ा नशा भंग का झूम रहे होरियार।
नाचें गायें तरंग में लेकर रंगों का हार।।
मस्त छटा होली की अद्भुत हैं संस्कार।
आओ मनायें मिलकर होली का त्यौहार।।
रंगों से सजी धरा इन्द्रधनुष सी बन जाती।
भारत के हर कोने तक होलीमय हो जाती।।
पिचकारी भी राजकुमारी सी इठलाती।
खुद को रिक्त कर त्याग का सन्देश दे जाती।।
रंग ना देखे क्षेत्र, धर्म, ना देखे कोई जाति।
चेहरा रंगकर गले मिले लोग भांति भांति।।
प्रेम के गीत गाती अबीर गुलाल की पाती।।
गौरवपूर्ण परंपरा अनुपम है इसकी थाती।
हर दिल से निकले प्रेम मिलन की झंकार
सुनहरे रंगों में छिपा सद्भावना का विचार।
समाहित है होली में गीता रामायण का सार।।
आओ मनायें मिलकर होली का त्यौहार
गंगा जमुना की तहजीब याद रहे होली में।
संस्कृति की मर्यादा याद रहे होली में।।
प्रेम के भावों का संवाद बना रहे होली में।
अनेकता में एकता का सुन्दर भाव रहे होली में।।
होली के संदेश का मन पर प्रभाव रहे होली में।
अंहकार की पराजय का पाठ याद रहे होली में।।
गुलाल से आसमां गुलाबी करना जरुर होली में।
नमन पहले उन्हें रक्त से धरा रंगी जिन्होंने होली में।।
समर्पित पहले उन्हें रंग अबीर गुलाल होली में।
वन्दन पहले उन्हें खुशियाँ जिनसे मिलीं होली में।।
तिलक गुलाल का सैनिकों के नाम रहे होली में।
शहीदों के शौर्य का पूज्य गुणगान रहे होली में।।
प्रेम रस बिखरे दिलों में यही होली का आधार।
दूर हो नफरत दिलों से यह होली का सरोकार।।
शुभकामनाएं सबको खुशियाँ मिले अपार।
आओ मनायें मिलकर होली का त्यौहार।।
......सतेन्द्र शर्मा 'तरंग'
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Nice
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