यह ब्लॉग खोजें

शनिवार, 31 जुलाई 2021

बाल गंगाधर तिलक

 बाल गंगाधर तिलक 

परिचय एवं 10 आश्चर्यजनक और अज्ञात तथ्य




 "समस्या संसाधनों या क्षमता की कमी नहीं है, बल्कि इच्छाशक्ति की कमी है।" - बाल गंगाधर तिलक


 "जीवन एक कार्ड गेम के बारे में है। सही कार्ड चुनना हमारे हाथ में नहीं है। लेकिन हाथ में कार्ड के साथ अच्छा खेलना हमारी सफलता निर्धारित करता है।"  - बाल गंगाधर तिलक


 जन्म : 23 जुलाई, 1856


 जन्म स्थान: रत्नागिरी, महाराष्ट्र


 पिता का नाम : गंगाधर तिलकी


 माता का नाम : पार्वतीबाई


 पति का नाम : सत्यभामाबाई


 बच्चे: रमाबाई वैद्य, पार्वतीबाई केलकर, विश्वनाथ बलवंत तिलक, रामभाऊ बलवंत तिलक, श्रीधर बलवंत तिलक और रमाबाई साने।


 शिक्षा: डेक्कन कॉलेज, पुणे, गवर्नमेंट लॉ कॉलेज या बॉम्बे विश्वविद्यालय (अब मुंबई) से एलएलबी की डिग्री।


 प्रसिद्ध के रूप में: लोकमान्य तिलकी


 एसोसिएटेड के रूप में: इंडियन नेशनल कांग्रेस, इंडियन होम रूल लीग, डेक्कन एजुकेशनल सोसाइटी


 राजनीतिक विचारधारा: राष्ट्रवाद, चरमपंथी


 प्रकाशन: वेदों में आर्कटिक होम (1903), श्रीमद्भगवत गीता रहस्य (1915)


 मृत्यु: 1 अगस्त, 1920


 स्मारक: तिलक वाड़ा, रत्नागिरी, महाराष्ट्र


 बाल गंगाधर तिलक एक समाज सुधारक, भारतीय राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता सेनानी थे।  वह स्वराज के प्रबल अनुयायी थे और 1 अगस्त, 1920 को उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपने भाषण मराठी या हिंदी में दिए।  निःसंदेह, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अपना शासन बनाकर भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में मदद की और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया।  आइए जानें बाल गंगाधर तिलक के बारे में कुछ आश्चर्यजनक और अज्ञात तथ्य।


 कांग्रेस के नरमपंथी और चरमपंथी नेतृत्व के बीच तुलना


 बाल गंगाधर तिलक के बारे में आश्चर्यजनक और अज्ञात तथ्य


 1. उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  १८७६ में, उन्होंने पूना के डेक्कन कॉलेज से गणित और संस्कृत में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।  1879 में, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय (अब मुंबई) में कानून पूरा किया।  इसके अलावा, उन्होंने पूना के एक निजी स्कूल में गणित पढ़ाने का फैसला किया, जहाँ से उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ।


 2. उन्होंने लोगों को विशेष रूप से अंग्रेजी भाषा में शिक्षित करने के लिए 1884 में डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की, क्योंकि उस समय उनका और उनके सहयोगियों का मानना ​​था कि उदार और लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए अंग्रेजी एक शक्तिशाली शक्ति है।


 ब्रिटिश पहली बार भारतीय क्षेत्र में कब और क्यों उतरे


 3. उन्होंने मराठी में 'केसरी' ("द लायन") और अंग्रेजी में 'द महरत्ता' जैसे अखबारों के जरिए लोगों को जगाना शुरू किया।  इन पत्रों से, वे प्रसिद्ध हो गए और अंग्रेजों और नरमपंथियों के तरीकों की आलोचना की, जो पश्चिमी तर्ज पर सामाजिक सुधारों और संवैधानिक तर्ज पर राजनीतिक सुधारों की वकालत करते हैं।


 4. बाल गंगाधर तिलक द्वारा 1893 में गणेश और 1895 में शिवाजी नामक दो महत्वपूर्ण त्योहारों का भी आयोजन किया गया था। गणेश क्योंकि भगवान हाथी के नेतृत्व में हैं और सभी हिंदुओं और शिवाजी द्वारा पूजा की जाती है क्योंकि वह पहले हिंदू शासक थे जिन्होंने मुस्लिम सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।  भारत और 17 वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य की स्थापना की।


 5. बाल गंगाधर तिलक 1890 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में शामिल हुए और स्वशासन की शुरुआत की।  वह पहले राष्ट्रवादी स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 'स्वराज' की अवधारणा को लाया।


 6. भारत में उन्होंने स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की।  जमशेद टाटा और तिलक ने मिलकर राष्ट्रीय आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए बॉम्बे स्वदेशी स्टोर्स की स्थापना की।


 7. क्या आप जानते हैं बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, और लाला लाजपत राय एक साथ 'लाल-बाल-पाल' के नाम से जाने जाते हैं।  तिलक एज ऑफ कंसेंट एक्ट 1891 के खिलाफ थे।


 8. राजनीतिक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तिलक एक जन आंदोलन उत्पन्न करना चाहते थे जो नरमपंथियों की राय से अलग हो और इसलिए 1907 में सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों में विभाजन हुआ।  अंग्रेजों ने स्थिति का लाभ उठाया और बाल गंगाधर तिलक को छह साल की जेल की सजा काटने के लिए बर्मा (म्यांमार) की मांडले जेल भेज दिया।


 9. अप्रैल 1916 में, बाल गंगाधर तिलक ने "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" के नारे के साथ इंडियन होम रूल लीग की शुरुआत की।  सितंबर 1916 में, एनी बेसेंट ने मद्रास (अब चेन्नई, तमिलनाडु) में होम रूल लीग की शुरुआत की।  1 अगस्त 1920 को बाल गंगाधर तिलक का निधन हो गया।


 10. उन्होंने वेदों में आर्कटिक होम प्रकाशित किया जो आर्यों की उत्पत्ति और श्रीमद भगवत गीता रहस्य (1915) का प्रतिनिधित्व करता है।  इसके अलावा, ओम राउत ने फिल्म लोकमान्य: एक युग पुरुष का निर्देशन किया जो 2 जनवरी, 2015 को रिलीज़ हुई थी।


 तो, बाल गंगाधर तिलक या लोकमान्य तिलक ने लोगों को प्रभावित किया, स्वराज का संदेश फैलाया।  वह एक महान वक्ता थे और उन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया।  महाराष्ट्र में, गणेश चतुर्थी को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है और इसे मुख्य त्योहारों में से एक माना जाता है जिसकी शुरुआत केवल तिलक ने की थी।  उन्होंने हिंदू धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने में काफी समय बिताया।

बुधवार, 14 जुलाई 2021

भारत में तीन चमत्कारिक शनि सिद्ध पीठ


भारत में तीन चमत्कारिक शनि सिद्ध पीठ



          शनि के चमत्कारिक सिद्ध पीठों में तीन पीठ ही मुख्य माने जाते हैं, इन सिद्ध पीठों मे जाने और अपने किये गये पापॊं की क्षमा मागने से जो भी पाप होते हैं उनके अन्दर कमी आकर जातक को फ़ौरन लाभ मिलता है। जो लोग इन चमत्कारिक पीठों को कोरी कल्पना मानते हैं, उअन्के प्रति केवल इतना ही कहा जा सकता है, कि उनके पुराने पुण्य कर्मों के अनुसार जब तक उनका जीवन सुचारु रूप से चल रहा तभी तक ठीक कहा जा सकता है, भविष्य मे जब कठिनाई सामने आयेगी, तो वे भी इन सिद्ध पीठों के लिये ढूंढते फ़िरेंगे, और उनको भी याद आयेगा कि कभी किसी के प्रति मखौल किया था। अगर इन सिद्ध पीठों के प्रति मान्यता नही होती तो आज से साढे तीन हजार साल पहले से कितने ही उन लोगों की तरह बुद्धिमान लोगों ने जन्म लिया होगा, और अपनी अपनी करते करते मर गये होंगे.लेकिन वे पीठ आज भी ज्यों के त्यों है और लोगों की मान्यता आज भी वैसी की वैसी ही है।


    महाराष्ट्र का शिंगणापुर गांव का सिद्ध पीठ


    शिंगणापुर गांव मे शनिदेव का अद्भुत चमत्कार है। इस गांव में आज तक किसी ने अपने घर में ताला नही लगाया, इसी बात से अन्दाज लगाया जा सकता है कि कितनी महानता इस सिद्ध पीठ में है। आज तक के इतिहास में किसी चोर ने आकर इस गांव में चोरी नही की, अगर किसी ने प्रयास भी किया है तो वह फ़ौरन ही पीडित हो गया। दर्शन, पूजा, तेल स्नान, शनिदेव को करवाने से तुरन्त शनि पीड़ाओं में कमी आजाती है, लेकिन वह ही यहां पहुंचता है, जिसके ऊपर शनिदेव की कृपा हो गयी होती है।

     


मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास शनिश्चरा मन्दिर


     महावीर हनुमानजी के द्वारा लंका से फ़ेंका हुआ अलौकिक शनिदेव का पिण्ड है, शनिशचरी अमावश्या को यहां मेला लगता है। और जातक शनि देव पर तेल चढाकर उनसे गले मिलते हैं। साथ ही पहने हुये कपडे जूते आदि वहीं पर छोड कर समस्त दरिद्रता को त्याग कर और क्लेशों को छोड कर अपने अपने घरों को चले जाते हैं। इस पीठ की पूजा करने पर भी तुरन्त फ़ल मिलता है।

        


उत्तर प्रदेश के कोशी के पास कौकिला वन में सिद्ध शनि देव का मन्दिर



       लोगों की हंसी करने की आदत है। रामायण के पुष्पक विमान की बात सुन कर लोग जो नही समझते थे, वे हंसी किया करते थे, जब तक स्वयं रामेश्वरम के दर्शन नही करें, तब तक पत्थर भी पानी में तैर सकते हैं, विश्वास ही नही होता, लेकिन जब रामकुन्ड के पास जाकर उस पत्थर के दर्शन किये और साक्षात रूप से पानी में तैरता हुआ पाया तो सिवाय नमस्कार करने के और कुछ समझ में नही आया। जब भगवान श्री कृष्ण का बंशी बजाता हुआ एक पैर से खडा हुआ रूप देखा तो समझ में आया कि विद्वानों ने शनि देव के बीज मंत्र में जो (शं) बीज का अच्छर चुना है, वह अगर रेखांकित रूप से सजा दिया जाये तो वह और कोई नही स्वयं शनिदेव के रूप मे भगवान श्री कृष्ण ही माने जायेंगे.यह सिद्ध पीठ कोसी से छ: किलोमीटर दूर और नन्द गांव से सटा हुआ कोकिला वन है, इस वन में द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण जो सोलह कला सम्पूर्ण ईश्वर हैं, ने शनि को कहावतों और पुराणों की कथाओं के अनुसार दर्शन दिया, और आशीर्वाद भी दिया कि यह वन उनका है, और जो इस वन की परिक्रमा करेगा, और शनिदेव की पूजा अर्चना करेगा, वह मेरी कृपा की तरह से ही शनिदेव की कृपा प्राप्त कर सकेगा.और जो भी जातक इस शनि सिद्ध पीठ के प्रति दर्शन, पूजा पाठ का अन्तर्मुखी होकर सद्भावना से विश्वास करेगा, वह भी शनि के किसी भी उपद्रव से ग्रस्त नही होगा.यहां पर शनिवार को मेला लगता है। जातक अपने अपने श्रद्धानुसार कोई दंडवत परिक्रमा करता है, या कोई पैदल परिक्रमा करता है, जो लोग शनि देव का राजा दशरथ कृत स्तोत्र का पाठ करते हुए, या शनि के बीज मंत्र का जाप करते हुये परिक्रमा करते हैं, उनको अच्छे फ़लों की शीघ्र प्राप्ति हो जाती है।


रविवार, 11 जुलाई 2021

_प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र


 *_प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह_*


 *_🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹_*

_कराग्रे वसते लक्ष्मी_

_करमध्ये सरस्वती।_

_करमूले तू गोविन्दः_

_प्रभाते करदर्शनम्॥_

        

 *_🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸_*

_समुद्र वसने देवी_

_पर्वत स्तन मंडिते।_

_विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं_

_पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥_


*_🔺त्रिदेव सह नवग्रह स्मरण🔺_*


_ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी_

_भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।_

_गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥_

            

  *_♥️ स्नान मन्त्र ♥️_*


_गंगे च यमुने चैव_

_गोदावरी सरस्वती।_

_नर्मदे सिन्धु कावेरी_

_जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥_

           

*_🌞 सूर्यनमस्कार🌞_*

_ॐ_

_सूर्य आत्माजगतस्तस्य_

_उषश्च आदित्यस्य नमस्कारं_

_ये कुर्वन्ति दिने दिने।_

_दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि_

_शोक विनाशनम्_

_सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥_


_ॐ मित्राय नम:_

_ॐ रवये नम:_

_ॐ सूर्याय नम:_

_ॐ भानवे नम:_

_ॐ खगाय नम:_

_ॐ पूष्णे नम:_

_ॐ हिरण्यगर्भाय नम:_

_ॐ मरीचये नम:_

_ॐ आदित्याय नम:_

_ॐ सवित्रे नम:_

_ॐ अर्काय नम:_

_ॐ भास्कराय नम:_

_ॐ श्री सवितृरे_

 _ॐ श्री सूर्यनारायणाय नम:_


_आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।_

_दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥_

               

 *_🔥दीप दर्शन🔥_*


_शुभं करोति कल्याणम्_

_आरोग्यम् धनसंपदा।_

_शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥_


_दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।_

_दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥_

            

*_🌷 गणपति स्तोत्र 🌷_*


_गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:।_

_द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥_

_विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।_

_द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥_

_विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्।_


_विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय।_

_लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥_

_नागाननाय श्रुतियज्ञ विभूषिताय।_

_गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥_


_शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।_

_प्रसन्नवदनं ध्यायेत्_

_सर्वविघ्नोपशान्तये॥_

        

*_⚡आदिशक्ति वंदना ⚡_*


_सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।_

_शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥_

           

*_🔴 शिव स्तुति 🔴_*


_कर्पूर गौरम करुणावतारं_

_संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।_

_सदा वसंतं हृदयार विन्दे_

_भवं भवानी सहितं नमामि॥_

              

*_🔵 विष्णु स्तुति 🔵_*


_शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं_

_विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।_

_लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्_

_वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥_

            

*_⚫ श्री कृष्ण स्तुति ⚫_*


_कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम।_

_नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥_

_सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि।_

_गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥_


_मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्‌।_

_यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्‌॥_

            

*_⚪ श्रीराम वंदना ⚪_*


_लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।_

_कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥_

              

 *_♦️श्रीरामाष्टक♦️_*


_हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।_

_गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥_

_हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।_

_बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥_

    

*_🔱 एक श्लोकी रामायण 🔱_*

_आदौ रामतपोवनादि गमनं_

_हत्वा मृगं कांचनम्।_

_वैदेही हरणं जटायु मरणं_

_सुग्रीवसम्भाषणम्॥_

_बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।_

_पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥_

           

*_🍁सरस्वती वंदना🍁_*


_या कुन्देन्दुतुषारहारधवला_

_या शुभ्रवस्त्रावृता।_

_या वींणावरदण्डमण्डितकरा_

_या श्वेतपदमासना ॥_

_या ब्रह्माच्युत शङ्कर _प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।_

_सा माम पातु सरस्वती भगवती_

_निःशेषजाड्याऽपहा॥_

            

*_🔔हनुमान वंदना🔔_*


_अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्‌।_

_दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्‌।_

_सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्‌।_

_रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥_


_मनोजवं मारुततुल्यवेगम_

_जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।_

_वातात्मजं वानरयूथमुख्यं_

_श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥_

         

*_🌹 स्वस्ति-वाचन 🌹_*


_ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः_

_स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।_

_स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः_

_स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥_

           

 *_❄ शांति पाठ ❄_*


_ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते।_

_पूर्णस्य पूर्णमादाय_ _पूर्णमेवावशिष्यते॥_


_ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,_

_पृथिवी शान्तिराप: शान्ति: रोषधय: शान्ति:।_

_वनस्पतय: शान्ति: विश्वे देवा: शान्तिः ब्रह्म शान्ति:_

_सर्व (गुँ ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥_


_॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥_


शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

अंतरिम बजट और लेखानुदान

अंतरिम बजट और लेखानुदान में क्या अंतर है



 अंतरिम बजट क्या है?


 एक अंतरिम बजट सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है यदि उसके पास पूरा बजट पेश करने का समय नहीं है।  यह आम तौर पर तब होता है जब चुनाव नजदीक होते हैं और मतदान से पहले बजट पेश किया जाता है।  यह तभी जायज है जब सत्ताधारी सरकार बजट पेश करे।


 इस तरह कार्रवाई में सरकार के पास वित्तीय वर्ष के अंत तक अधिकार होंगे न कि निवर्तमान सरकार के पास।


 जब नई सरकार एक नया बजट तैयार करती है, तो वह अंतरिम बजट में निर्धारित अनुमानों को या तो बदल सकती है या उनका पालन कर सकती है, जैसा वह उचित समझे।



 हालांकि इसे नियमित बजट की तरह ही पूरे साल के लिए पेश किया जाता है।  अंतरिम बजट में, चुनाव आयोग सरकार को विभिन्न नीतियों से बांधता है जो मतदान शुरू होने से पहले आम जनता को प्रभावित नहीं कर सकती हैं।


 

 अंतरिम बजट




 चुनाव के समय पूर्ण बजट पेश करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए सरकार अंतरिम बजट पेश करती है।


 लेखानुदान एक ऐसा प्रावधान है जिसके द्वारा सरकार नई सरकार के गठन तक खर्च को वहन करने के लिए पर्याप्त धनराशि के लिए संसद की मंजूरी लेती है।


 अंतरिम बजट में व्यय और प्राप्तियां दोनों शामिल होते हैं


 वोट-ऑन-अकाउंट केवल सरकार द्वारा वहन किए जाने वाले व्यय को सूचीबद्ध करता है


 लोकसभा में इस पर चर्चा होनी है और फिर पास होना है।


 लेखानुदान को एक औपचारिक मामला माना जाता है, इसलिए इसे लोकसभा द्वारा बिना चर्चा के पारित किया जा सकता है


 भारत सरकार के पास अंतरिम बजट में भी कर व्यवस्था में बदलाव करने की शक्ति है।


 लेखानुदान किसी भी कीमत पर प्रत्यक्ष करों को नहीं बदल सकता है।  प्रत्यक्ष करों में कोई भी परिवर्तन केवल वित्त विधेयक पारित करके ही लाया जा सकता है।


 यह संक्रमण काल ​​​​के लिए एक बजट की तरह है (जब सरकार के सत्ता में रहने के कुछ महीने शेष हैं)


 लेखानुदान अंतरिम बजट के माध्यम से पारित किया जा सकता है।


 वोट ऑन अकाउंट क्या है?


 यह अंतरिम बजट के माध्यम से पारित किया जाता है और सरकार को चुनाव होने से पहले छोटे खर्चों को पूरा करने की अनुमति देता है।  इसे एक सम्मेलन के रूप में पारित किया जाता है और इसमें इस तरह की कोई चर्चा नहीं होती है।  यह अग्रिम अनुदान की तरह है कि सरकार को अनुदान की मांग पर मतदान और वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक के पारित होने तक कार्य करने की आवश्यकता है।



 

कैलाश मानसरोवर रहस्य

 कैलाश मानसरोवर रहस्य 


#भगवान_शंकर_के_निवास_स्थान कैलाश पर्वत के पास स्थित है कैलाश मानसरोवर। यह अद्भुत स्थान रहस्यों से भरा है। शिवपुराण, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में #कैलाश खंड नाम से अलग ही अध्याय है, जहां की महिमा का गुणगान किया गया है।


#पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी के पास कुबेर की नगरी है। यहीं से महाविष्णु के कर-कमलों से निकलकर गंगा कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है, जहां प्रभु शिव उन्हें अपनी जटाओं में भर धरती में निर्मल धारा के रूप में प्रवाहित करते हैं। #कैलाश_पर्वत के ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्यलोक है। आओ जानते हैं इसके 12 रहस्य।


#1_धरती_का_केंद्र: धरती के एक ओर उत्तरी ध्रुव है, तो दूसरी ओर दक्षिणी ध्रुव। दोनों के बीचोबीच स्थित है हिमालय। हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों #हिन्दू_जैन_बौद्ध_और_सिख धर्म का केंद्र है।


#2_अलौकिक_शक्ति_का_केंद्र : यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां #दसों_दिशाएं मिल जाती हैं। रशिया के वैज्ञानिकों के अनुसार एक्सिस मुंडी वह स्थान है, जहां अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं।


#3_पिरामिडनुमा_क्यों_है_यह_पर्वत : कैलाश पर्वत एक विशालकाय पिरामिड है, जो 100 छोटे पिरामिडों का केंद्र है। कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 दिक् बिंदुओं के समान है और #एकांत_स्थान पर स्थित है, जहां कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है।


#4_शिखर_पर_कोई_नहीं_चढ़_सकता : कैलाश पर्वत पर चढ़ना निषिद्ध है, परंतु 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी #मिलारेपा ने इस पर चढ़ाई की थी। रशिया के वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट 'यूएनस्पेशियल' मैग्जीन के 2004 के जनवरी अंक में प्रकाशित हुई थी। हालांकि मिलारेपा ने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा इसलिए यह भी एक रहस्य है।


#5_दो_रहस्यमयी_सरोवरों_का_रहस्य : यहां 2 सरोवर मुख्य हैं- पहला, मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, राक्षस नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब दक्षिण से देखते हैं तो एक स्वस्तिक चिह्न वास्तव में देखा जा सकता है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया?


#6_यहीं_से_क्यों_सभी_नदियों_का_उद्गम : इस पर्वत की कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली हैं। कैलाश की चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख हैं जिसमें से नदियों का उद्गम होता है। पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।


#7_सिर्फ_पुण्यात्माएं_ही_निवास_कर_सकती_हैं : यहां पुण्यात्माएं ही रह सकती हैं। कैलाश पर्वत और उसके आसपास के वातावरण पर अध्ययन कर चुके रशिया के वैज्ञानिकों ने जब तिब्बत के मंदिरों में #धर्मगुरुओं से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह है जिसमें तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरुओं के साथ टेलीपैथिक संपर्क करते हैं।


#9_येति_मानव_का_रहस्य : हिमालयवासियों का कहना है कि हिमालय पर यति मानव रहता है। कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव। यह धारणा प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है। कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं। विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं।


#10_कस्तूरी_मृग_का_रहस्य : दुनिया का सबसे दुर्लभ मृग है कस्तूरी मृग। यह हिरण उत्तर पाकिस्तान, उत्तर भारत, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, मंगोलिया में ही पाया जाता है। इस मृग की कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और औषधीय गुणों से युक्त होती है, जो उसके शरीर के पिछले हिस्से की ग्रंथि में एक पदार्थ के रूप में होती है। कस्तूरी मृग की कस्तूरी दुनिया में सबसे महंगे पशु उत्पादों में से एक है।


#11_डमरू_और_ओम_की_आवाज : यदि आप कैलाश पर्वत या मानसरोवर झील के क्षेत्र में जाएंगे, तो आपको

निरंतर एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो। लेकिन ध्यान से सुनने पर यह आवाज 'डमरू' या 'ॐ' की ध्वनि जैसी होती है। 


वैज्ञानिक कहते हैं कि हो सकता है कि यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो। यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहां से 'ॐ' की आवाजें सुनाई देती हैं।


#12_आसमान_में_लाइट_का_चमकना : दावा किया जाता है कि कई बार कैलाश पर्वत पर 7 तरह की लाइटें आसमान में चमकती हुई देखी गई हैं। नासा के वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि हो सकता है कि ऐसा यहां के चुम्बकीय बल के कारण होता हो। यहां का चुम्बकीय बल आसमान से मिलकर कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण कर सकता


'आत्मनिर्भर कृषि ऐप'

 केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 'आत्मनिर्भर कृषि ऐप' लॉन्च किया


केंद्र सरकार ने 29 जून 2021 को किसानों को खेती संबंधी जानकारी और मौसम की पहले से सूचना उपलब्ध कराने हेतु 'आत्मनिर्भर कृषि ऐप' की शुरुआत की है. राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म 'किसानमित्र' पर विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा uकिसानों के लिए प्रासंगिक जानकारी का खजाना अब 'आत्मनिर्भर कृषि ऐप' के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है.



किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी देने के लिए देश में अभी कई प्लेटफॉर्म काम करते हैं, इस ऐप पर सरकार उन सभी जानकारियों को एक ही जगह पर लाई है. इससे किसानों को खेती-किसानी की अलग-अलग जानकारी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भटकना नहीं होगा और वो बस अपने स्मार्टफोन पर एक टैप से पूरी जानकारी पा सकेंगे.



किसानों के लिए उपयोगी जानकारी

केंद्र सरकार ने किसानों की जरूरत से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को ‘किसान मित्र’ नाम के राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकत्रित किया गया है. इसमें कृषि विभाग, मौसम विभाग, इसरो, नेशनल वाटर इंफॉर्मेटिक्स सेंटर, भारतीय कृषि अनुसंधान केन्द्र और सरकार के अन्य मंत्रालय एवं विभागों की किसानों के लिए उपयोगी जानकारी शामिल है. इसी जानकारी को अब ज्यादा आसान तरीके से किसानों को इस ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है.



12 स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध

‘आत्मनिर्भर कृषि ऐप’ देश की 12 स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होगी. इसमें अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी, तमिल, मराठी, गुजराती और बांग्ला शामिल है. ऐप पर जानकारी पढ़ने की जरूरत भी नही हैं. किसान 12 भाषाओं में इस जानकारी का अनुवाद सुन भी सकते हैं. टेक महिन्द्रा ने इस ऐप को तैयार किया है.



एंड्राइड और विंडोज के ऐप स्टोर पर उपलब्ध

सरकार का यह ऐप अभी एंड्राइड और विंडोज के ऐप स्टोर पर उपलब्ध है. किसानों के साथ-साथ किसान उत्पादक संगठन (FPO), कृषि विकास केन्द्र (KVK), गैर-सरकारी संगठन (NGO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और स्टार्टअप भी मुफ्त उपयोग कर सकते हैं.


इस ऐप की खासियत

इस ऐप को खासतौर से ऐसे डिजाइन किया गया है कि ये स्लो इंटरनेट कनेक्टिविटी में भी काम करेगा. ये ऐप जीपीएस पर काम करता है. ऐसे में जब आप ऐप को डाउनलोड करते हैं तो ये उस जगह की लोकेशन के हिसाब से वहां के मौसम इत्यादि की जानकारी फोन में सेव कर लेता है. ताकि किसान बाद में भी उस जानकारी का लाभ उठा सकें.


सप्ताह भर के मौसम की जानकारी

इस ऐप के द्वारा किसान को मौसम में नमी या उमस, बादलों की स्थिति, तापमान और हवा की दिशा या तूफान आने की जानकारी मिलती है. ऐप में किसानों को मौसम आधारित जानकारी भी मिलती है. इस सेक्शन पर क्लिक करने के बाद किसान को सप्ताह भर के मौसम की जानकारी, उससे जुड़ी फसलों और पशुधन की देखभाल की जानकारी मिलती है.


अलग-अलग फसलों की जानकारी

इस ऐप पर किसान अपने स्थान के फसल चक्र के डेटा को देख सकते हैं. इसमें किसान कई तरह के फसलों की जानकारी हासिल कर सकता है. किसी विशेष फसल पर क्लिक करके उसे फसल पर दबाव, वृद्धि दर और कीट संक्रमण इत्यादि की जानकारी मिलती है.


खेत की मिट्टी की उर्वरता से जुड़ी जानकारी

ऐप में किसान को अपने खेत की मिट्टी की उर्वरता इत्यादि से जुड़ी जानकारी मिलती है. उसे सॉइल हेल्थ कार्ड की पूरी जानकारी मिलती है. इतना ही नहीं इस विकल्प पर क्लिक करके वह अपने आस-पास के खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता भी चेक कर सकता है.

गुरुवार, 1 जुलाई 2021

महाभारत में वर्णित ये पेंतीस नगर

 महाभारत में वर्णित ये पेंतीस नगर आज भी मौजूद हैं!


भारत देश महाभारतकाल में कई बड़े जनपदों में बंटा हुआ था। हम महाभारत में वर्णित जिन 35 राज्यों और शहरों के बारे में जिक्र करने जा रहे हैं, वे आज भी मौजूद हैं। आप भी देखिए।


1. गांधार👉 आज के कंधार को कभी गांधार के रूप में जाना जाता था। यह देश पाकिस्तान के रावलपिन्डी से लेकर सुदूर अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी वहां के राजा सुबल की पुत्री थीं। गांधारी के भाई शकुनी दुर्योधन के मामा थे।


2. तक्षशिला👉 तक्षशिला गांधार देश की राजधानी थी। इसे वर्तमान में रावलपिन्डी कहा जाता है। तक्षशिला को ज्ञान और शिक्षा की नगरी भी कहा गया है।


3. केकय प्रदेश👉  जम्मू-कश्मीर के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में केकय प्रदेश के रूप में है। केकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ हुआ था। उनका पुत्र विन्द जरासंध, दुर्योधन का मित्र था। महाभारत के युद्ध में विन्द ने कौरवों का साथ दिया था।


4. मद्र देश👉 केकय प्रदेश से ही सटा हुआ मद्र देश का आशय जम्मू-कश्मीर से ही है। एतरेय ब्राह्मण के मुताबिक, हिमालय के नजदीक होने की वजह से मद्र देश को उत्तर कुरू भी कहा जाता था। महाभारत काल में मद्र देश के राजा शल्य थे, जिनकी बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र थे।


5. उज्जनक👉 आज के नैनीताल का जिक्र महाभारत में उज्जनक के रूप में किया गया है। गुरु द्रोणचार्य यहां पांडवों और कौरवों की अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देते थे। कुन्ती पुत्र भीम ने गुरु द्रोण के आदेश पर यहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। यही वजह है कि इस क्षेत्र को भीमशंकर के नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान शिव का एक विशाल मंदिर है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह शिवलिंग 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक ह

6. शिवि देश👉 महाभारत काल में दक्षिण पंजाब को शिवि देश कहा जाता था। महाभारत में महाराज उशीनर का जिक्र है, जिनके पौत्र शैव्य थे। शैव्य की पुत्री देविका का विवाह युधिष्ठिर से हुआ था। शैव्य एक महान धनुर्धारी थे और उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया था।


7. वाणगंगा👉 कुरुक्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वाणगंगा। कहा जाता है कि महाभारत की भीषण लड़ाई में घायल पितामह भीष्म को यहां सर-सैय्या पर लिटाया गया था। कथा के मुताबिक, भीष्ण ने प्यास लगने पर जब पानी की मांग की तो अर्जुन ने अपने वाणों से धरती पर प्रहार किया और गंगा की धारा फूट पड़ी। यही वजह है कि इस स्थान को वाणगंगा कहा जाता है।


8. कुरुक्षेत्र👉 हरियाणा के अम्बाला इलाके को कुरुक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहां महाभारत की प्रसिद्ध लड़ाई हुई थी। यही नहीं, आदिकाल में ब्रह्माजी ने यहां यज्ञ का आयोजन किया था। इस स्थान पर एक ब्रह्म सरोवर या ब्रह्मकुंड भी है। श्रीमद् भागवत में लिखा हुआ है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश के अन्य सदस्यों के साथ इस सरोवर में स्नान किया था।


9. हस्तिनापुर👉 महाभारत में उल्लिखित हस्तिनापुर का इलाका मेरठ के आसपास है। यह स्थान चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। सही मायने में महाभारत युद्ध की पटकथा यहीं लिखी गई थी। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हस्तिनापुर को अपने राज्य की राजधानी बनाया।


10. वर्नावत👉 यह स्थान भी उत्तर प्रदेश के मेरठ के नजदीक ही माना जाता है। वर्णावत में पांडवों को छल से मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह का निर्माण करवाया था। यह स्थान गंगा नदी के किनारे है। महाभारत की कथा के मुताबिक, इस ऐतिहासिक युद्ध को टालने के लिए पांडवों ने जिन पांच गांवों की मांग रखी थी, उनमें एक वर्णावत भी था। आज भी यहां एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम वर्णावा है।

#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र

11. पांचाल प्रदेश👉 हिमालय की तराई का इलाका पांचाल प्रदेश के रूप में उल्लिखित है। पांचाल के राजा द्रुपद थे, जिनकी पुत्री द्रौपदी का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। द्रौपदी को पांचाली के नाम से भी जाना जाता है।


12. इन्द्रप्रस्थ👉 मौजूदा समय में दक्षिण दिल्ली के इस इलाके का वर्णन महाभारत में इन्द्रप्रस्थ के रूप में है। कथा के मुताबिक, इस स्थान पर एक वियावान जंगल था, जिसका नाम खांडव-वन था। पांडवों ने विश्वकर्मा की मदद से यहां अपनी राजधानी बनाई थी। इन्द्रप्रस्थ नामक छोटा सा कस्बा आज भी मौजूद है।


13. वृन्दावन👉 यह स्थान मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर है। वृन्दावन को भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं के लिए जाना जाता है। यहां का बांके-बिहारी मंदिर प्रसिद्ध है।


14. गोकुल👉 यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह स्थान भी मथुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर है। कंस से रक्षा के लिए कृष्ण के पिता वसुदेव ने उन्हें अपने मित्र नंदराय के घर गोकुल में छोड़ दिया था। कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम गोकुल में साथ-साथ पले-बढ़े थे।


15. बरसाना👉 यह स्थान भी उत्तर प्रदेश में है। यहां की चार पहाड़ियां के बारे में कहा जाता है कि ये ब्रह्मा के चार मुख हैं।


16. मथुरा👉 यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह प्रसिद्ध शहर हिन्दू धर्म के लिए अनुयायियों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। यहां राजा कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यहीं पर श्रीकृष्ण ने बाद में कंस की हत्या की थी। बाद में कृष्ण के पौत्र वृजनाथ को मथुरा की राजगद्दी दी गई।


17. अंग देश👉 वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के इलाके का उल्लेख महाभारत में अंगदेश के रूप में है। दुर्योधन ने कर्ण को इस देश का राजा घोषित किया था। मान्यताओं के मुताबिक, जरासंध ने अंग देश दुर्योधन को उपहारस्वरूप भेंट किया था। इस स्थान को शक्तिपीठ के रूप में भी जाना जाता है।


18. कौशाम्बी👉 कौशाम्बी वत्स देश की राजधानी थी। वर्तमान में इलाहाबाद के नजदीक इस नगर के लोगों ने महाभारत के युद्ध में कौरवों का साथ दिया था। बाद में कुरुवंशियों ने कौशाम्बी पर अपना अधिकार कर लिया। परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया।

#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र

19. काशी👉 महाभारत काल में काशी को शिक्षा का गढ़ माना जाता था। महाभारत की कथा के मुताबिक, पितामह भीष्म काशी नरेश की पुत्रियों अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका को जीत कर ले गए थे ताकि उनका विवाह विचित्रवीर्य से कर सकें। अम्बा के प्रेम संबंध राजा शल्य के साथ थे, इसलिए उसने विचित्रवीर्य से विवाह से इन्कार कर दिया। अम्बिका और अम्बालिका का विवाह विचित्रवीर्य के साथ कर दिया गया। विचित्रवीर्य के अम्बा और अम्बालिका से दो पुत्र धृतराष्ट्र और पान्डु हुए। बाद में धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव कहलाए और पान्डु के पांडव।


20. एकचक्रनगरी👉 वर्तमान कालखंड में बिहार का आरा जिला महाभारत काल में एकचक्रनगरी के रूप में जाना जाता था। लाक्षागृह की साजिश से बचने के बाद पांडव काफी समय तक एकचक्रनगरी में रहे थे। इस स्थान पर भीम ने बकासुर नामक एक राक्षक का अन्त किया था। महाभारत युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ किया था, उस समय बकासुर के पुत्र भीषक ने उनका घोड़ा पकड कर रख लिया था। बाद में वह अर्जुन के हाथों मारा गया।


21. मगध👉 दक्षिण बिहार में मौजूद मगध जरासंध की राजधानी थी। जरासंध की दो पुत्रियां अस्ती और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था। जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तब वह अनायास ही जरासंध के दुश्मन बन बैठे। जरासंध ने मथुरा पर कई बार हमला किया। बाद में एक मल्लयुद्ध के दौरान भीम ने जरासंध का अंत किया। महाभारत के युद्ध में मगध की जनता ने पांडवों का समर्थन किया था।


22. पुन्डरू देश👉 मौजूदा समय में बिहार के इस स्थान पर राजा पोन्ड्रक का राज था। पोन्ड्रक जरासंध का मित्र था और उसे लगता था कि वह कृष्ण है। उसने न केवल कृष्ण का वेश धारण किया था, बल्कि उसे वासुदेव और पुरुषोत्तम कहलवाना पसन्द था। द्रौपदी के स्वयंवर में वह भी मौजूद था। कृष्ण से उसकी दुश्मनी जगजाहिर थी। द्वारका पर एक हमले के दौरान वह भगवान श्रीकृष्ण के हाथों मारा गया।


23. प्रागज्योतिषपुर👉 गुवाहाटी का उल्लेख महाभारत में प्रागज्योतिषपुर के रूप में किया गया है। महाभारत काल में यहां नरकासुर का राज था, जिसने 16 हजार लड़कियों को बन्दी बना रखा था। बाद में श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और सभी 16 हजार लड़कियों को वहां से छुड़ाकर द्वारका लाए। उन्होंने सभी से विवाह किया। मान्यता है कि यहां के प्रसिद्ध कामख्या देवी मंदिर को नरकासुर ने बनवाया था।


24. कामख्या👉 गुवाहाटी से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामख्या एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। भागवत पुराण के मुताबिक, जब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर बदहवाश इधर-उधर भाग रहे थे, तभी भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर के कई टुकड़े कर दिए। इसका आशय यह था कि भगवान शिव को सती के मृत शरीर के भार से मुक्ति मिल जाए। सती के अंगों के 51 टुकड़े जगह-जगह गिरे और बाद में ये स्थान शक्तिपीठ बने। कामख्या भी उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है।

#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र

25. मणिपुर👉 नगालैन्ड, असम, मिजोरम और वर्मा से घिरा हुआ मणिपुर महाभारत काल से भी पुराना है। मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। इस विवाह से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम था बभ्रुवाहन। राजा चित्रवाहन की मृत्यु के बाद बभ्रुवाहन को यहां का राजपाट दिया गया। बभ्रुवाहन ने युधिष्ठिर द्वारा आयोजित किए गए राजसूय यज्ञ में भाग लिया था।


26. सिन्धु देश👉 सिन्धु देश का तात्पर्य प्राचीन सिन्धु सभ्यता से है। यह स्थान न केवल अपनी कला और साहित्य के लिए विख्यात था, बल्कि वाणिज्य और व्यापार में भी यह अग्रणी था। यहां के राजा जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःश्शाला के साथ हुआ था। महाभारत के युद्ध में जयद्रथ ने कौरवों का साथ दिया था और चक्रव्युह के दौरान अभिमन्यू की मौत में उसकी बड़ी भूमिका थी।


27. मत्स्य देश👉 राजस्थान के उत्तरी इलाके का उल्लेख महाभारत में मत्स्य देश के रूप में है। इसकी राजधानी थी विराटनगरी। अज्ञातवास के दौरान पांडव वेश बदल कर राजा विराट के सेवक बन कर रहे थे। यहां राजा विराट के सेनापति और साले कीचक ने द्रौपदी पर बुरी नजर डाली थी। बाद में भीम ने उसकी हत्या कर दी। अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू का विवाह राजा विराट की पुत्री उत्तरा के साथ हुआ था।


28. मुचकुन्द तीर्थ👉 यह स्थान धौलपुर, राजस्थान में है। मथुरा पर जीत हासिल करने के बाद कालयावन ने भगवान श्रीकृष्ण का पीछा किया तो उन्होंने खुद को एक गुफा में छुपा लिया। उस गुफा में मुचकुन्द सो रहे थे, उन पर कृष्ण ने अपना पीताम्बर डाल दिया। कृष्ण का पीछा करते हुए कालयावन भी उसी गुफा में आ पहुंचा। मुचकुन्द को कृष्ण समझकर उसने उन्हें जगा दिया। जैसे ही मुचकुन्द ने आंख खोला तो कालयावन जलकर भस्म हो गया। मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब पांडव हिमालय की तरफ चले गए और कृष्ण गोलोक निवासी हो गए, तब कलयुग ने पहली बार यहां अपने पग रखे थे।


29. पाटन👉 महाभारत की कथा के मुताबिक, गुजरात का पाटन द्वापर युग में एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र था। पाटन के नजदीक ही भीम ने हिडिम्ब नामक राक्षस का संहार किया था और उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह किया। हिडिम्बा ने बाद में एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम था घटोत्कच्छ। घटोत्कच्छ और उनके पुत्र बर्बरीक की कहानी महाभारत में विस्तार से दी गई है।


30. द्वारका👉 माना जाता है कि गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुन्दर में समा गया। कथाओं के मुताबिक, जरासंध के बार-बार के हमलों से यदुवंशियों को बचाने के लिए कृष्ण मथुरा से अपनी राजधानी स्थानांतरित कर द्वारका ले गए।

#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र

31. प्रभाष👉 गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित इस स्थान के बारे में कहा जाता है कि यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण का निवास-स्थान रहा है। महाभारत कथा के मुताबिक, यहां भगवान श्रीकृष्ण पैर के अंगूठे में तीर लगने की वजह से घायल हो गए थे। उनके गोलोकवासी होने के बाद द्वारका नगरी समुन्दर में डूब गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि समुन्दर के सतह पर द्वारका नगरी के अवेशष मिले हैं।


32. अवन्तिका👉 मध्यप्रदेश के उज्जैन का उल्लेख महाभारत में अवन्तिका के रूप में मिलता है। यहां ऋषि सांदपनी का आश्रम था। अवन्तिका को देश के सात प्रमुख पवित्र नगरों में एक माना जाता है। यहां भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में एक महाकाल लिंग स्थापित है।


33. चेदी👉 वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र को महाभारत काल में चेदी देश के रूप में जाना जाता था। गंगा व नर्मदा के मध्य स्थित चेदी महाभारत काल के संपन्न नगरों में एक था। इस राज्य पर श्रीकृष्ण के फुफेरे भाई शिशुपाल का राज था। शिशुपाल रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था, लेकिन श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचा लिया। 


इस घटना की वजह से शिशुपाल और श्रीकृष्ण के बीच संबंध खराब हो गए। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय चेदी नरेश शिशुपाल को भी आमंत्रित किया गया था। शिशुपाल ने यहां कृष्ण को बुरा-भला कहा, तो कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका गला काट दिया। महाभरत की कथा के मुताबिक, दुश्मनी की बात सामने आने पर श्रीकृष्ण की बुआ उनसे शिशुपाल को अभयदान देने की गुजारिश की थी। इस पर श्रीकृष्ण ने बुआ से कहा था कि वह शिशुपाल के 100 अपराधों को माफ कर दें, लेकिन 101वीं गलती पर माफ नहीं करेंगे।


34. सोणितपुर👉 मध्यप्रदेश के इटारसी को महाभारत काल में सोणितपुर के नाम से जाना जाता था। सोणितपुर पर वाणासुर का राज था। वाणासुर की पुत्री उषा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ सम्पन्न हुआ था। यह स्थान हिन्दुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ है।


35. विदर्भ👉 महाभारतकाल में विदर्भ क्षेत्र पर जरासंध के मित्र राजा भीष्मक का शासन था। रुक्मिणी भीष्मक की पुत्री थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचाया था। यही वजह थी कि भीष्मक उन्हें अपना शत्रु मानने लगे। जब पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया था, तब भीष्मक ने उनका घोड़ा रोक लिया था। सहदेव ने भीष्मक को युद्ध में हरा दिया।


 


भारत के प्रमुख बांध की सूची


भारत में प्रमुख / मध्यम आकार के बांधों की कुल संख्या 3200 होने का अनुमान है। लेकिन इससे पहले कि हम भारत में प्रमुख / महत्वपूर्ण बांधों की सूची जानने के लिए आगे बढ़ें, भारत में बांधों की उत्पत्ति को समझें।


भारत में बांधों की उत्पत्ति?

भारत में, सबसे पुराना बांध ग्रैंड अनिकट बांध या कल्लानाई बांध है जो पहली शताब्दी में चोल राजवंश के राजा करिकलन द्वारा कावेरी नदी पर बनाया गया था यह बांध असमान पत्थरों के साथ बनाया गया था और 329 मीटर की लंबाई और 20 मीटर की चौड़ाई पर बनाया गया था इस बांध का मुख्य उद्देश्य सिंचाई उद्देश्यों के लिए डेल्टा में पानी को हटाना था।


➤भारत में शीर्ष 5 सबसे बड़े बांध


1. टिहरी बांध, उत्तराखंड


यह भारत का सबसे ऊँचा बांध है और यह 260.5 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस बांध के निर्माण की लागत 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। टिहरी बांध दुनिया के सबसे ऊंचे बांधों में से एक है। टिहरी बांध भागीरथी नदी पर स्थित है और इसमें 1,000 मेगावाट (1,300,000 अश्वशक्ति) हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी उत्पादन की क्षमता है।



ऊंचाई260 मीटरलंबाई575 मीटरनदीभागीरथी नदीस्थानउत्तराखंडस्थापित क्षमता1,000MWप्रकारअर्थ एंड रॉकफिल


2. भाखड़ा नांगल बांध, हिमाचल प्रदेश


226 मीटर ऊंचे इस बांध को बिलासपुर में सतलज नदी के ऊपर बनाया गया है। एक और बांध नीचे की ओर है, जिसे नांगल बांध कहा जाता है। एक साथ दोनों बांधों को भाखड़ा – नांगल बांध कहा जाता है। वर्ष 1963 में इस बांध की निर्माण लागत रु 245.28 करोड़ रु थी। भाखड़ा – नांगल बांध तीन राज्य सरकारों – राजस्थान, हरियाणा और पंजाब का एक संयुक्त उद्यम है।



ऊंचाई226 मीटरलंबाई520 मीटरनदीसतलज नदीस्थानपंजाब और हिमाचल प्रदेशस्थापित क्षमता1,325 MWप्रकारठोस गुरुत्वाकर्षण


3. सरदार सरोवर बांध, गुजरात


यह बांध भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वी पटेल की दूरदृष्टि थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 5 अप्रैल, 1961 को इस बांध की नींव रखी थी। हाल ही में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने 67 वें जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया।


जैसा कि बांध की योजना चल रही थी, बांध ने सामाजिक कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि यह आरोप लगाया गया था कि बांध आवश्यक पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियों को पूरा नहीं करता है। कार्यकत्र्ताओं के बीच, मेधा पाटकर ने बांध के निर्माण को रोकने का बीड़ा उठाया।



ऊंचाई163 मीटरलंबाई1,210 मीटरनदीनर्मदा नदीस्थानगुजरातस्थापित क्षमता1,450 MWप्रकारग्रेविटी बांध


4. हीराकुंड बांध, ओडिशा


यह बांध महानदी नदी पर 60.96 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 1957 में निर्माण की कुल लागत 1.01 बिलियन थी।



ऊंचाई60.96 मीटरलंबाई25.8 किलोमीटरनदीमहानदी नदीस्थानओडिशास्थापित क्षमता307.5 MWप्रकारकम्पोजिट बांध


5. नागार्जुनसागर बांध, तेलंगाना


यह नागार्जुन सागर में कृष्णा नदी पर बनाया गया है तथा इसकी निर्माण लागत 1300 करोड़ रुपये थी।


ऊंचाई124 मीटरलंबाई1,450 मीटरनदीकृष्णा नदीस्थानतेलंगानास्थापित क्षमता816 MWप्रकारचिनाई बांध


➤भारत के प्रमुख बांध की सूची


यहां भारत और उन नदियों पर बने महत्वपूर्ण बांधों की एक सूची दी गई है जिन पर वे बनाए गए हैं।


राज्यनामनदी का नाम आंध्र प्रदेशसोमासिला बांधपेनार नदीश्रीशैलम बांधकृष्णा नदीगुजरातउकाई बांधतापी नदीधारोई बांधसाबरमती नदीकदाना बांधमाही नदीदंतीवाड़ा बांधबनस नदीहिमाचल प्रदेश और पंजाब सीमाभाकड़ा नंगल बांध बांधसतलज नदीहिमाचल प्रदेशपांडोह बांधबीस नदीनाथपा झक्री बांधसतलज नदीचमेरा बांधरवि नदीजम्मू और कश्मीरबागलीहार बांधचेनाब नदीदुम्हहर जलविद्युत बांधसिंधु नदीउरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक बांधझेलम नदीझारखंडमैथॉन बांधबरकर नदीचंडील बांधस्वर्णरेखा नदीपैचेत बांधदामोदर नदीकर्नाटकतुंगा भाद्र बांधतुंगभद्रा नदीलिंगानामाकीबांधशारवती नदीकद्र बांधकालिंदी नदीअलामाट्टी बांधकृष्णा नदीसुपा बांधकालिंदी या काली नदीकृष्णा राजा सागर बांधकावेरी नदीहरंगी बांधहरंगी नदीनारायणपुर बांधकृष्णा नदीकोडदाल्ली बांधकाली नदीकेरलमालमपुझा बांधमालमपुझा नदीपिची बांधमनाली नदीइडुक्की बांधपेरियार नदीकुंडला बांधकुंडला झीलपरंबिकुलम बांधपरंबिकुलम नदीवालयार बांधवालयार नदीमुल्परपेरिया बांधपेरियार नदीनेययार बांधनेययार नदीमध्यप्रदेशबर्ना बांधबर्ना नदीबरगी बांधनर्मदा नदीबंसगर बांधसोन नदीगांधी सागर बांधचंबल नदीमहाराष्ट्रयेदारी बांधपूर्णा नदीउज्जानी बांधभीमा नदीपवना बांधमावल नदीमुलशी बांधमुला नदीकोयना बांधकोयना नदीजयकवाड़ी बांधगोदावरी नदीभट्टा बांधभत्सा नदीविल्सन बांधप्रवरा नदीतंसा बांधतन्सा नदीपंशेत बांधअंबी नदीमुला बांधमुला नदीकोलकावाड़ी बांधवशिष्ठ नदीगिरना बांधगिराना नदीवैतरना बांधवैतरना नदीखडकवासला बांधमुथा नदीगंगापुर बांधगोदावरी नदीतेलंगानाराधागारी बांधभगवती नदीलोअर मैनेर बांधमैनेर नदीमिड मैनयर बांधमैनयर नदी और एसआरएसपी बाढ़ प्रवाह नहरऊपरी मैनेर बांधमैनेर नदी और कुडलेयर नदीसिंगुर बांधमंजजीरा नदीनिजाम सागर बांधमंजजीरा नदीओड़ीसाइंद्रवती बांधइंद्रवती नदीहीराकुंड बांधमहानदी नदीतमिलनाडूवैगी बांधवैगी नदीपरंचानी बांधपरलाययार नदीमेट्तूर बांधकावेरी नदीउत्तराखंडतेहरी बांधभागीरथी नदीधौली गंगा बांधधौली गंगा नदी



➤भारत के प्रमुख बांध – रोचक तथ्य


भारत में लोकप्रिय बांधों के कुछ दिलचस्प तथ्य यहां दिए गए हैं:


1. तेहरी बांध, उत्तराखंड –यह भारत में सबसे ऊंचा बांध है और यह 260.5 मीटर की ऊंचाई पर है। इस बांध के निर्माण की लागत 1 अरब अमेरिकी डॉलर थी। तहरी बांध भी दुनिया के सबसे ऊंचे बांधों में से एक है। तेहरी बांध भागीरथी नदी पर स्थित है और इसमें 1000 मेगावाट (1,300,000 एचपी) जलविद्युत पैदा करने की क्षमता है।


2. भाखड़ा बांध, हिमाचल प्रदेश – यह बांध 226 मीटर लंबा है, यह बांध बिलासपुर में सेलेज नदी पर बनाया गया है। एक और बांध डाउनस्ट्रीम है, जिसे नांगल बांध कहा जाता है। दोनों बांधों को भाखड़ा – नांगल बांध कहा जाता है। वर्ष 1963 में इस बांध की निर्माण लागत 245.28 करोड़ रुपये थी। भाखड़ा – नांगल बांध तीन राज्य सरकारों – राजस्थान, हरियाणा और पंजाब का संयुक्त उद्यम है।


3. नागार्जुन सागर बांध, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना – यह बांध भारत का चौथा सबसे बड़ा बांध है और 124 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी निर्माण लागत 1300 करोड़ रुपये थी। इस बांध को नागार्जुन सागर में कृष्णा नदी पर बनाया गया है।


4. हीराकुंड बांध, ओडिशा – यह बांध महानदी नदी पर 60.9 6 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 1957 में इसके निर्माण की कुल लागत 1.01 बिलियन रूपये थी।


 


 


 


 



*हनुमान जी के 5 मुख्य नामों के पीछे की कथाएं*


*हनुमान जी के विभिन्न नाम व उससे जुड़ी कथा*


*#1. पवनपुत्र / वायुपुत्र*


हनुमान जी की माता का नाम अंजलि था जो अपने पिछले जन्म में अंजना नाम की एक देव कन्या थी। अंजना को एक ऋषि से श्राप मिला था कि वह जिस किसी से भी प्रेम करेगी उसका मुख बंदर सामान हो जायेगा। अगले जन्म में माता अंजना ने पृथ्वी पर अंजलि के रूप में जन्म लिया और केसरी नामक एक वानर से विवाह रचाया।


माता अंजलि भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी कोख से जन्म लेने का वरदान दिया। जब राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहे थे तब ऋषि ने दशरथ की तीनो पत्नियों को खीर खाने को दी। माता कौशल्या की खीर की प्याली में अचानक एक चील आई और थोड़ी सी खीर अपने पंजे में लेकर उड़ गयी।


माता अंजलि एक जगह पर भगवान शिव की आराधना कर रही थी तब शिवजी ने वायुदेव को चील के पंजे से वह खीर माता अंजलि के हाथों में गिराने का आदेश दिया। वायुदेव ने ठीक वैसा ही किया और माता अंजलि ने वह खीर भगवान शिव का आशीर्वाद समझकर खा ली जिसके बाद उन्होंने मारुति को जन्म दिया। इसलिये उन्हें पवनपुत्र या वायुपुत्र के नाम से भी जाना जाता है।


*#2. हनुमान नाम कैसे पड़ा* 


जैसा की हमने आपको बताया कि हनुमान जी का असली नाम मारुति था तो अब सोचने वाली बात यह है कि उनका नाम हनुमान कैसे पड़ा? दरअसल हनुमान संस्कृत भाषा का शब्द है जो दो शब्दों के मेल से बना है: हनु अर्थात जबड़ा व मान अर्थात विकृत। इस तरह हनुमान का अर्थ हुआ विकृत या मुड़े हुए जबड़े वाला। किन्तु क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी का जबड़ा जन्म के समय एक दम सही था तो उनका जबड़ा टेढ़ा कैसे हुआ?


जब भगवान हनुमान छोटे थे तब उन्होंने आकाश में सूर्य को देखा जिसे उन्होंने एक फल समझा। इसी कारण वे आकाश में उड़े और सूर्य को निगल लिया जिस कारण पूरे विश्व में अंधकार छा गया। इससे क्रोधित होकर इंद्र देव ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया जो उनके जबड़े पर लगा और वे मुर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। तब से उनका जबड़ा थोड़ा टेढ़ा हो गया और उनका नाम हनुमान पड़ा।


*#3. बजरंगबली का अर्थ*


संस्कृत भाषा में बजरंग का अर्थ कुमकुम या सिंदूर से होता है। इसके पीछे भी एक रोचक कथा है। आप सभी को यह भलीभांति ज्ञात है कि भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान थे और हनुमान जी को भी प्रभु राम से अत्यधिक लगाव था (Bajrangbali)।


एक दिन हनुमान जी को माता सीता के सिंदूर लगाने की बात पता चली तो वे उत्सुकता वश इसके पीछे का कारण पूछ बैठे। तो सीता माता ने उन्हें बताया कि वह सिंदूर श्री राम के लिए लगाती है जिससे वे स्वस्थ रहते है और दीर्घायु बनते है। इतना सुनते ही हनुमान जी ने सोचा कि यदि माता सीता के केवल इतना सा सिंदूर लगाने से इतना प्रभाव पड़ सकता है तो मुझसे क्यों नही।


इसके बाद उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर का लेप लगा लिया तब से उनका नाम बजरंग बलि पड़ गया। इसलिये आज भी आपको हनुमान जी के मंदिर में सिंदूर चढ़ाने की परंपरा मिलेगी।


 

*#4. संकट मोचन नाम क्या है*


चाहे हनुमान चालीसा हो या रामायण, सभी में हनुमान जी को संकट मोचन (Sankatmochan) कहा गया है। अर्थात हनुमान जी ऐसे महापुरुष थे जो अपने चाहने वालो के संकट मिटाते थे। चाहे वह माता सीता को ढूँढना हो या लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी  लाना। जब-जब भगवान राम पर कोई विपदा आई तब-तब उन्होंने अपने परम भक्त हनुमान को याद किया और हनुमान ने उनका हर संकट दूर भी किया।


हनुमान की निष्ठाभाव से की गयी भक्ति से प्रसन्न होकर माता सीता ने उन्हें अजय अमर होने का आशीर्वाद दिया था। अर्थात हनुमान जी ही भगवान के रूप में ऐसे जीवित मनुष्य है जिन्होंने अमर होने का वरदान प्राप्त किया। लोगों का आज भी यह प्रबल रूप से मानना हैं कि भगवान हनुमान आज भी किसी ना किसी रूप में इस पृथ्वी पर है और उन्हें अगर सच्चे मन से याद किया जाये तो वे अपने भक्तों के हर संकट हरते है।


*#5. हनुमान जी का पंचमुखी अवतार*


पंचमुखी भी एक संस्कृत भाषा का शब्द है जो दो शब्दों के जोड़ने से बना हैं। इसमें पंच का अर्थ संख्या पांच से है व मुखी का अर्थ मुहं से है अर्थात पांच मुहं वाले हनुमान।


एक बार रावण के भाई अहिरावण या महिरावण जो अपनी मायावी शक्तिओं के लिए प्रसिद्ध था, उसने भगवान राम व लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था और उन्हें पाताल लोक ले गया था। वह वहां अपनी देवी महामाया के सामने दोनों की बलि चढ़ाने वाला था किन्तु हनुमान वहां उन्हें बचाने आ गए।


वहां उन्होंने देखा कि पांच दिशाओं में पांच दीपक जल रहे हैं जिन्हें एक साथ बुझाने पर ही अहिरावण का वध संभव था। इसलिये हनुमान ने पांच मुख वाले हनुमान का रूप धरा जिसमे उन्होंने वराह, गरुड़, नरसिंह व हयग्रीव देवताओं के मुख धरे और अहिरावण का वध किया।


*वाणी  बोलो  प्रेम  की , करो  राम  से  काम।*

*यह जीवन  है राम का, करो  राम  के  नाम*