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बुधवार, 30 मार्च 2022

प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा (कविता)

 प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना  होगा (कविता)


जीवन के अनुबंधों की,

तिलांजलि संबंधों की,

टूटे मन के तारो की,

फिर से नई कड़ी गढ़ना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


बेटी का धर्म निभाने को,

पत्नी का मर्म सिखाने को,

भाई का प्रेम बताने को,

हर चौपाई दोहा सुनना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


लक्ष्मण से सेवा त्याग सीखना,

श्री भरत से राज विराग सीखना,

प्रभु का सबसे अनुराग सीखना,

फिर माता सीता को गुनना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


केवट की भक्ति भरी गगरी,

फल मीठे बेर लिए शबरी,

है धन्य अयोध्या की नगरी,

अवसादों में जब घिरना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा ।।*


न्याय नीति पर राम अड़े,

संग सखा वीर हनुमान खड़े,

पशु-पक्षी तक हैं युद्ध लड़े,

धन्य हुआ उनका तरना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


जो राम नाम रघुराई  है,

जीवन की मूल दवाई है,

हर महामंत्र चौपाई है,

सियाराम नाम जपते रहना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


जगती में मूल तत्व क्या है?

राम नाम का महत्व क्या है?

संघर्ष में राम रामत्व क्या है?

संकट में जब तुम फंसना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


हर समाधान मिल जाता है,

कोई प्रश्न ठहर नहीं  पाता है,

बस राम ही राम सुहाता है

श्री राम है वाणी का गहना,

*प्रिय तुम्हे रामचरितमानस पढ़ना होगा।।*


हजारो साल पुराना इतिहास : विभिन्न जाति भेद षडयंत्र

2  अप्रैल*नववर्ष की अनंत शुभकामनाए 2079*                                    चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं। 


*सम्राट शांतनु* ने विवाह किया एक *मछवारे की पुत्री सत्यवती* से ।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की।


सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए *भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?*


महाभारत लिखने वाले *वेद व्यास भी मछवारे थे*, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो।


*विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे*, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।


*भीम ने वनवासी हिडिम्बा* से विवाह किया।


*श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय* करने वालों के परिवार से थे, 


उनके भाई *बलराम खेती करते थे*, हमेशा हल साथ रखते थे।


*यादव क्षत्रिय* रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया।


*राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे*।


उनके पुत्र *लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल* में पढ़े जो *वन के वासी थे।


तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार।


*वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे वो बदले जा सकते थे*, जिसको आज इकोनॉमिक्स में डिवीज़न ऑफ़ लेबर कहते हैं वो ही।


प्राचीन भारत की बात करें, तो भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस *नन्द वंश का राज रहा वो जाति से नाई थे* । 


नन्द वंश की शुरुवात महापद्मनंद ने की थी जो की राजा नाई थे। बाद में वो राजा बन गए फिर उनके बेटे भी, *बाद में सभी क्षत्रिय ही कहलाये*।


उसके बाद *मौर्य वंश* का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत *चन्द्रगुप्त से हुई,जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे* और एक *ब्राह्मण चाणक्य ने* उन्हें पूरे देश का सम्राट बनाया । 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा।


फिर *गुप्त वंश* का राज हुआ, जो कि *घोड़े का अस्तबल चलाते थे* और घोड़ों का व्यापार करते थे।140 साल देश पर गुप्ताओं का राज रहा।


केवल *पुष्यमित्र शुंग* के 36 साल के राज को छोड़ कर *92% समय प्राचीन काल में देश में शासन उन्ही का  रहा, जिन्हें आज दलित पिछड़ा कहते हैं तो शोषण कहां से हो गया*? यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।


फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन 1100- 1750 तक है, इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम शासन रहा।


अंत में *मराठों* का उदय हुआ, बाजी राव पेशवा जो कि ब्राह्मण थे, ने *गाय चराने वाले गायकवाड़* को गुजरात का राजा बनाया, *चरवाहा जाति के होलकर* को मालवा का राजा बनाया।


*अहिल्या बाई होलकर* खुद बहुत बड़ी शिवभक्त थी। ढेरों मंदिर गुरुकुल उन्होंने बनवाये। 


*मीरा बाई जो कि राजपूत थी, उनके गुरु एक चर्मकार रविदास थे* और *रविदास के गुरु ब्राह्मण रामानंद* थे|।


यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है।


*मुग़ल काल से देश में गंदगी शुरू हो गई* और यहां से *पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह* जैसी चीजें शुरू होती हैं।


*1800-1947 तक अंग्रेजो के शासन* रहा और यहीं से *जातिवाद* शुरू हुआ । जो उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत किया। 


अंग्रेज अधिकारी *निकोलस डार्क की किताब "कास्ट ऑफ़ माइंड"* में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ में इसका राजनीतिकरण किया।


इन हजारों सालों के इतिहास में *देश में कई विदेशी आये* जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखी हैं, जैसे कि *मेगास्थनीज* ने इंडिका लिखी, *फाहियान*,  *ह्यू सांग* और *अलबरूनी* जैसे कई। किसी ने भी नहीं लिखा की यहां किसी का शोषण होता था।


*योगी आदित्यनाथ* जो ब्राह्मण नहीं हैं, गोरखपुर मंदिर के महंत  हैं, पिछड़ी जाति की *उमा भारती* महा मंडलेश्वर रही हैं। जन्म आधारित जातीय व्यवस्था हिन्दुओ को कमजोर करने के लिए लाई गई थी।


इसलिए भारतीय होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्र से खुद भी बचें और औरों को भी बचाएं ।


      🌹🙏🌹

मंगलवार, 29 मार्च 2022

ॐ (OM) उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ :

 ॐ (OM) उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ

ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से बना है।

अ उ म् ।

"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,

"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।


ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।

ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

जानीए

ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...


● *उच्चारण की विधि*

प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

01) *ॐ और थायराॅयडः*

ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।


*02) *ॐ और घबराहटः-*

अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।


*03) *..ॐ और तनावः-*

यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।


*04) *ॐ और खून का प्रवाहः-*

यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।


*5) ॐ और पाचनः-*

ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।


*06) ॐ लाए स्फूर्तिः-*

इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।


*07) ॐ और थकान:-*

थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।


*08) .ॐ और नींदः-*

नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।


*09) .ॐ और फेफड़े:-*

कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।


*10) ॐ और रीढ़ की हड्डी:-*

ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।


*11) ॐ दूर करे तनावः-*

ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे । साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे जिनकी आपको फिक्र है ।

अपना ख्याल रखिये, खुश रहें ।

देवेन्द्र कुमार शर्मा 

  सनातन धर्म परिवार

मंगलवार, 8 मार्च 2022

वेद और मनुस्मृति में नारी की महिमा


वेद और मनुस्मृति में नारी की महिमा


वेदों में स्त्रियों पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं है।  वैदिक काल में नारी अध्ययन अध्यापन से लेकर रणक्षेत्र में भी जाती थी,जैसे कैकयी महाराज दशरथ के साथ युद्ध में गई थी । कन्या को अपना वर स्वयं चुनने का अधिकार देकर वेद उनको पुरुष से एक कदम आगे रखते हैं । अनेक ऋषिकाएं वेद मंत्रों की द्रष्टा हुई हैं जैसे अपाला, घोषा,सरस्वती, सर्पराज्ञी, सूर्या, सावित्री, अदिति, दाक्षायनी, लोपामुद्रा, विश्ववारा, आत्रेयी आदि।  वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामयी व उच्च स्थान प्रदान करते हैं। वेदों में स्त्रियों की शिक्षा,दीक्षा,शील, गुण, कर्तव्य, अधिकार और सामाजिक भूमिका का जो सुन्दर वर्णन पाया जाता है, वैसा संसार के अन्य किसी धर्मग्रंथ में नहीं है । वेद उन्हें घर की सम्राज्ञी कहते हैं, देश की शासक, पृथ्वी की सम्राज्ञी तक बनने का अधिकार देते हैं। वेदों में स्त्री यज्ञीय है अर्थात् यज्ञ समान पूजनीय । वेदों में नारी को ज्ञान देने वाली, सुख समृद्धि लाने वाली, विशेष तेज वाली, देवी, विदुषी, सरस्वती, इन्द्राणी, उषा इत्यादि अनेक आदर सूचक नाम दिए गए हैं-


वेदों में नारी की महिमा


१. उषा के समान प्रकाशवती- ऋग्वेद ४/१४/३- हे राष्ट्र की पूजा योग्य नारी! तुम परिवार और राष्ट्र में सत्यम, शिवम्, सुंदरम की अरुण कान्तियों को छिटकती हुई आओ , अपने विस्मयकारी सद्गुणगणों के द्वारा अविद्या ग्रस्त जनों को प्रबोध प्रदान करो. जन-जन को सुख देने के लिए अपने जगमग करते हुए रथ पर बैठ कर आओ।


२. वीरांगना- यजुर्वेद ५/१०- हे नारी! तू स्वयं को पहचान. तू शेरनी हैं, तू शत्रु रूप मृगों का मर्दन करनेवाली हैं, देवजनों के हितार्थ अपने अन्दर सामर्थ्य उत्पन्न कर. हे नारी ! तू अविद्या आदि दोषों पर शेरनी की तरह टूटने वाली हैं, तू दिव्य गुणों के प्रचारार्थ स्वयं को शुद्ध कर! हे नारी ! तू दुष्कर्म एवं दुर्व्यसनों को शेरनी के समान विश्वंस्त करनेवाली हैं, धार्मिक जनों के हितार्थ स्वयं को दिव्य गुणों से अलंकृत कर।


३. वीर प्रसवा- ऋग्वेद १०/४७/३- राष्ट्र को नारी कैसी संतान दे ? हमारे राष्ट्र को ऐसी अद्भुत एवं वर्षक संतान प्राप्त हो, जो उत्कृष्ट कोटि के हथियारों को चलाने में कुशल हो, उत्तम प्रकार से अपनी तथा दूसरों की रक्षा करने में प्रवीण हो, सम्यक नेतृत्व करने वाली हो, धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष रूप चार पुरुषार्थ- समुद्रों का अवगाहन करनेवाली हो, विविध संपदाओं की धारक हो, अतिशय क्रियाशील हो, प्रशंशनीय हो, बहुतों से वरणीय हो, आपदाओं की निवारक हो।


४. विद्या अलंकृता- यजुर्वेद २०/८४- विदुषी नारी अपने विद्या-बलों से हमारे जीवनों को पवित्र करती रहे. वह कर्मनिष्ठ बनकर अपने कर्मों से हमारे व्यवहारों को पवित्र करती रहे. अपने श्रेष्ठ ज्ञान एवं कर्मों के द्वारा संतानों एवं शिष्यों में सद्गुणों और सत्कर्मों को बसाने वाली वह देवी गृह आश्रम -यज्ञ एवं ज्ञान- यज्ञ को सुचारू रूप से संचालित करती रहे.


५. स्नेहमयी माँ - अथर्वेवेद ७/६८/२ हे प्रेमरसमयी माँ! तुम हमारे लिए मंगल कारिणी बनो, तुम हमारे लिए शांति बरसाने वाली बनो, तुम हमारे लिए उत्कृष्ट सुख देने वाली बनो. हम तुम्हारी कृपा- दृष्टि से कभी वंचित न हो.


६. अन्नपूर्ण- अथर्ववेद ३/२८/४ इस गृह आश्रम में पुष्टि प्राप्त हो, इस गृह आश्रम में रस प्राप्त हो. इस गिरः आश्रम में हे देवी! तू दूध-घी आदि सहस्त्रों पोषक पदार्थों का दान कर. हे यम- नियमों का पालन करने वाली गृहणी! जिन गाय आदि पशु से पोषक पदार्थ प्राप्त होते हैं उनका तू पोषण कर।


: *मनुस्मृति में नारी का सम्मान-*


*३.५६-यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:। अर्थात् जहां स्त्रियों का सत्कार और सम्मान होता है, वहां श्रेष्ठ लोगों व देवताओं का वास होता है।*


*३.५७- शोचन्ति जामयो यत्र विनष्यत्याषु तत्कुलम्र। न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तध्दि सर्वदा॥ अर्थात् जिस समाज में स्त्रियां शोक व चिंताग्रस्त होती हैं, वह समाज शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहां स्त्रियां निष्चिंत और सुखी रहती हैं, वह समाज सदैव विकास करता रहता है।*


*८.३५२- स्त्रियों पर बलात्कार करने वाले, उन्हें उत्पीडित करने वाले, व्यभिचार में प्रवृत्त करने वाले व आतंकित करने वाले को भयानक दण्ड दें ताकि कोई दूसरा इस विचार से भी कांप जाए।*


मंगलवार, 1 मार्च 2022

पढाई करते समय ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें जो दिलाएंगे सफलता

 *_पढाई करते समय ध्यान  देने योग्य महत्वपूर्ण बातें ._* 


1 -पढाई हमेशा कुर्सी टेबल पर बैठ कर ही करें बिस्तर पर लेट कर बिलकुल भी न पढ़े लेटकर पढ़ने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नहीं जाता बल्कि नींद आने लगती है । 
                                             

2 -पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे · । -

 3- पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ करदे या साईलेंट मोड में रखें । 

4 पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे । 5- कोई भी पाठ्य कम से तीन बार जरूर पढ़े । · 

6 रटने की प्रवृत्ति से बचे जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरूर करें । 

7- शार्ट नोट्स जरूर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये । 

8- पढ़े हुए पाठ्य पर विचार 3 विमर्श अपने मित्रो से जरूर करें ग्रुप डिस्कशन पढाई में लाभदायक होता है । 

9- पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टोपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें । 

10 संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है , जबकि कम भोजन से पढ़ने में मन नहीं लगता है और थकावट , सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।

 11- चित्रों मानचित्रो रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है । ग्राफ · 

12- पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सकते हैं ।

महाशिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा करने का विधान, महूरत मुहूर्त

महाशिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा करने का विधान

जानिए महाशिवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि


🕉️ *_01 मार्च 2022 फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में इस महाशिवरात्रि का बहुत अधिक महत्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से व्यक्ति को विशेष फलों की प्राप्ति होती है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 1 मार्च 2022, मंगलवार को मनाया जाएगा।_*


*_शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि महाशिवरात्रि दिन से ही सृष्टि का प्रारंभ हुआ था। वहीं ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दश्याम आदिदेवो महानिशि। शिवलिंग तयोद्भूत: कोटि सूर्य समप्रभ:॥ फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महानिशीथकाल में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे।_*


*_वहीं कई मान्यताओं में माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ है। गरुड़ पुराण, स्कन्द पुराण, पद्मपुराण और अग्निपुराण आदि में शिवरात्रि का वर्णन मिलता है। कहते हैं शिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति बिल्व पत्तियों से शिव जी की पूजा करता है और रात के समय जागकर भगवान के मंत्रों का जाप करता है, उसे भगवान शिव आनन्द और मोक्ष प्रदान करते हैं।_*


महाशिवरात्रि  का शुभ मुहूर्त


🔱 *_महाशिवरात्रि 1 मार्च को सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 2 मार्च को सुबह 10 तक रहेगी।_*

👉🏼 *_पहला प्रहर का मुहूर्त- 1 मार्च शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात्रि 9 बजकर 27 मिनट तक_*

👉🏼 *_दूसरे प्रहर का मुहूर्त- 1 मार्च रात्रि 9 बजकर 27 मिनट से 12 बजकर  33 मिनट तक_*

👉🏼 *_तीसरे प्रहर का मुहूर्त- 1 मार्च रात्रि 12 बजकर 33 मिनट से सुबह 3  बजकर 39 मिनट तक_*

👉🏼 *_चौथे प्रहर का मुहूर्त- 2 मार्च सुबह 3 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक_*

👉🏼 *_पारण समय- 2 मार्च को सुबह  6 बजकर 45 मिनट के बाद_*


महाशिवरात्रि की पूजा विधि_


*_महाशिवरात्रि के दिन सबसे पहले शिवलिंग में चन्दन के लेप लगाकर पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। इसके बाद ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही शिव पूजा के बाद गोबर के उपलों की अग्नि जलाकर तिल, चावल और घी की मिश्रित आहुति देनी चाहिए। इस तरह होम के बाद किसी भी एक साबुत फल की आहुति दें। सामान्यतया लोग सूखे नारियल की आहुति देते हैं। व्यक्ति यह व्रत करके, ब्राह्मणों को खाना खिलाकर और दीपदान करके स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है।_*


शिवरात्रि की पूजा विधि के विषय में भी अलग-अलग मत हैं-


*_सनातन धर्म के अनुसार शिवलिंग स्नान के लिये रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घृत और चौथे प्रहर में मधु, यानी शहद से स्नान करना चाहिए। चारों प्रहर में शिवलिंग स्नान के लिये मंत्र भी हैं-_*


➡️ *_प्रथम प्रहर में- ‘ह्रीं ईशानाय नमः’_*

➡️ *_दूसरे प्रहर में- ‘ह्रीं अघोराय नमः’_*

➡️ *_तीसरे प्रहर में- ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’_*

➡️ *_चौथे प्रहर में- ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः’।। मंत्र का जाप करना चाहिए।_*


💁🏻‍♀️ *_वहीं वर्ष क्रिया कौमुदी के पृष्ठ 513 में आया है कि दूसरे, तीसरे और चौथे प्रहर में व्रती को पूजा, अर्घ्य, जप और कथा सुननी चाहिए, स्तोत्र पाठ करना चाहिए। साथ ही प्रातःकाल अर्घ्यजल के साथ क्षमा मांगनी चाहिए, लेकिन व्यक्तिगत रूप से मेरा विश्वास क्षमा मांगने में नहीं है क्योंकि क्षमा तो दूसरों से मांगी जाती है। मैंने तो खुद को शिव जी को अर्पित कर दिया है-_*


*_अहं निर्विकल्पो निराकाररूपः_*

*_विभुर्व्याप्य सर्वत्र सर्वेनिद्रियाणाम्।_*

*_सदा मे समत्वं न मुक्तिर्न बन्धः_*

*_चिदानंदरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्।।_*


🤷🏻‍♀️ *_अर्थात् “मैं समस्त संदेहों से परे, बिना किसी आकार वाला, सर्वगत, सर्वव्यापक, सभी इन्द्रियों को व्याप्त करके स्थित हूं, मैं सदैव समता में स्थित हूं, न मुझमें मुक्ति है और न बंधन, मैं चैतन्य रूप हूं, आनंद हूं, शिव हूं, शिव हूं”।।_*