यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

हिन्दू धर्म में कुछ संख्याओं का विशेष महत्व

 पूरा जरूर पड़े अतिमहत्वपूर्ण जानकारी

हिन्दू धर्म में कुछ संख्याओं का विशेष महत्व


एक ओम्कार् 👉 ॐ 


दो लिंग👉 नर और नारी ।


दो पक्ष👉 शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।


दो पूजा👉 वैदिकी और तांत्रिकी।


दो अयन 👉 उत्तरायन और दक्षिणायन।


तीन देव👉 ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।


तीन देवियाँ👉 सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती।


तीन लोक 👉 पृथ्वी, आकाश, पाताल।


तीन गुण👉 सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।


तीन स्थिति👉 ठोस, द्रव, गैस।


तीन स्तर👉 प्रारंभ, मध्य, अंत।


तीन पड़ाव👉 बचपन, जवानी, बुढ़ापा।


तीन रचनाएँ 👉 देव, दानव, मानव।


तीन अवस्था👉 जागृत, मृत, बेहोशी।


तीन काल👉 भूत, भविष्य, वर्तमान।


तीन नाड़ी👉 इडा, पिंगला, सुषुम्ना।


तीन संध्या👉 प्रात:, मध्याह्न, सायं।


तीन शक्ति👉 इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।


चार धाम👉 बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।


चार मुनि👉 सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।


चार वर्ण👉 ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।


चार निति👉 साम, दाम, दंड, भेद।


चार वेद👉 सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।


चार स्त्री👉 माता, पत्नी, बहन, पुत्री।


चार युग👉 सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।


चार समय👉 सुबह, शाम, दिन, रात।


चार अप्सरा👉 उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।


चार गुरु👉 माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।


चार प्राणी👉 जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।


चार जीव 👉 अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।


चार वाणी👉 ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।


चार आश्रम👉 ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास।


चार भोज्य👉 खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।


चार पुरुषार्थ👉 धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।


चार वाद्य👉 तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।


पाँच तत्व👉 पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।


पाँच देवता👉 गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।


पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ👉 आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।


पाँच कर्म👉 रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।


पाँच उंगलियां👉 अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।


पाँच पूजा उपचार👉 गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।


पाँच अमृत👉 दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।


पाँच प्रेत👉 भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।


पाँच स्वाद👉 मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।


पाँच वायु👉 प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।


पाँच इन्द्रियाँ👉 आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।


पाँच वटवृक्ष👉 सिद्धवट (उज्जैन), 

अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।


पाँच पत्ते👉 आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।


पाँच कन्या :👉 अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।


छ: ॠतु👉 शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।


छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।


छ: कर्म👉 देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।


छ: दोष :👉 काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य।


सात छंद 👉 गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।


सात स्वर👉 सा, रे, ग, म, प, ध, नि।


सात सुर👉 षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।


सात चक्र👉 सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।


सात वार 👉 रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।


सात मिट्टी👉 गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।


सात महाद्वीप👉 जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप।


सात ॠषि👉 वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक।


सात ॠषि 👉 वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज।

सात धातु (शारीरिक)👉 रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।


सात रंग👉 बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।


सात पाताल👉 अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल।


सात पुरी👉 मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची।

सात धान्य👉 उड़द, गेहूँ, चना, चांवल, जौ, मूँग, बाजरा।


आठ मातृका👉 ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा।


आठ लक्ष्मी👉 आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।


आठ वसु👉 अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास।

आठ सिद्धि👉 अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।


आठ धातु👉 सोना, चांदी, ताम्बा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा।


नवदुर्गा👉 शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।


नवग्रह👉 सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।


नवरत्न👉 हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया।


नवनिधि👉 पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि।


दस महाविद्या👉 काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।


दस दिशाएँ👉 पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे।


दस दिक्पाल👉 इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत।


दस अवतार (विष्णुजी)👉 मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।


दस सति 👉 सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती।


उक्त जानकारी वेदों के आधार पर है।

मंगलवार, 11 जुलाई 2023

पैर छूने की परंपरा और नियम

 *🚩पैर छूने की परंपरा: सनातन धर्म, संस्कृति और परंपरा में संतों के और बड़ों बुजुर्गों के पैर छूने की परंपरा है, परंतु क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों से पैर छुआना वर्जित है या यह कहें कि कुछ लोगों को पैर नहीं छूना चाहिए।*
 *सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार :* 
*🚩कुंवारी कन्या :-* कुंवारी कन्याओं को किसी के पैर नहीं छूना चाहिए या यदि कोई कुंवारी कन्या आपके पैर छूने का प्रयास करें तो उसे रोक दें अन्यथा आपको पाप लगेगा। छोटी बच्चियों और कन्याओं के तो पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
 
*🚩बेटियां :-* किसी भी पिता को अपनी बेटियों से पैर नहीं छुआना चाहिए। बेटियों को भी चाहिए कि वह पिता के पैर नहीं छुए अन्यथा पिता को पाप लगता है। बेटियों को देवी का रूप माना जाता है इसलिए उनसे चरण नहीं छुआना चाहिए।
*🚩बहुएं :-* कुछ समाज में बहुएं अपनी सास के पैर छू सकती है, परंतु श्वसुर के नहीं क्योंकि बहुएं घर की लक्ष्मी होती हैं।
 
*🚩मंदिर में :-* यदि आप मंदिर में हैं और आपको वहां पर कोई बड़ा-बुजुर्ग या सम्मानीय व्यक्ति मिल जाता है तो आप पहले भगवान को प्रणाम करें  क्योंकि मंदिर में भगवान से बड़ा कोई नहीं होता। भगवान के सामने किसी के पैर छूना मंदिर और भगवान का अपमान माना जाता है।
 
*🚩पूजा कर रहे व्यक्ति के पैर छूना :-* यदि कोई व्यक्ति मंदिर या घर में पूजा कर रहा है उस दौरान उसके पैर छूना उचित नहीं है। ऐसे में दोनों को ही पाप लगता है। दूसरी बात इससे पूजा में बाधा उत्पन्न होती है।
 
*🚩सोये हुए व्यक्ति के पैर छूना :-* यदि कोई व्यक्ति सो रहा है या लेटा हुआ है तो उस समय उसके पैर नहीं छूना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे लेटे हुए व्यक्ति की उम्र घटती है। केवल मरे हुए व्यक्ति के ही पैर छुए जाते हैं।
 
*🚩श्मशान से लौटे व्यक्ति के पैर छूना :-* यदि कोई  सम्‍मानित व्‍यक्ति या बड़े-बुजुर्ग श्‍मशान घाट से लौट रहे हैं तो उन्हें देखकर कई लोग उनके पैर छूने लगते हैं जो कि गलत है। अंतिम संस्कार से लौटने पर व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है ऐसे में उसके पैर छूना वर्जित है। स्नान करने के बाद ही उसके पैर छू सकते हैं। इसी प्रकार श्मशान में भी किसी के पैर नहीं छूना चाहिए।
 
*🚩अशुद्ध व्यक्ति :-* यदि आप किसी कारण से अशुद्ध हो गए हैं या जिसके आप पैर छूना चाहते हैं वह अशुद्ध है तो दोनों ही स्थिति में पैर नहीं छूना चाहिए। इसे दोनों को ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।
 
*🚩भांजा भांजी :-* यदि आप किसी के भांजे हैं तो आपको मामा मामी के पैर नही छूना चाहिए क्योंकि भांजा या भांजी पूजनीय होते हैं। मामा मामी को पाप लगता है।
 
*🚩पत्नी :-* पति पत्नी का रिश्ता बहुत ही पवित्र रिश्ता होता है और यह सांझेदारी का रिश्ता होता है।
 परंतु पति को कभी भी अपनी पत्नी के पैर नहीं छूना चाहिए क्योंकि इससे पत्नी को पाप लगता है।
🙏जय सियाराम🙏
x

सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

कलयुग के प्रभावी होने के लक्षण

  
कलयुग के प्रभावी होने के लक्षण


1= कुटुम्ब कम हुआ

2=सम्बंध कम हुए

3= नींद कम हुई

4= बात कम हुए

5=प्रेम कम हुआ

6=कपड़े कम हुए

7=सरम कम हुई

8=लाज लज्जा कम हुई

9=मर्यादा कम हुई

10=बच्चे कम हुए

11=घर में खाना कम हुआ

12=पुस्तक वाचन कम हुआ

13=भाई भाई प्रेम कम हुआ

15=चलना कम हुआ

16=खुराक कम हुआ

17=घी, मक्खन कम हुआ

18=तांबे, पीतल के बर्तन    कम हुए

19=सुख चैन कम हुआ

20=मेहमान कम हुए

21=सत्य कम हुआ

22=सभ्यता कम हुई

23=मन मिलाप कम हुआ

24=समर्पण कम हुआ

🌹🙏

1=परिवार से ज्यादा ससुराल अच्छा लगने लगा

2=बहन से अच्छी साली लगने लगी

3=भाई से ज्यादा साले अच्छे लगने लगे

4=मां से अच्छी सास लगने लगी

5=मोज शौक के लिए समय मिलने लगा

6=होटल का खाना अच्छा लगने लगा

7=फिल्मे, घूमने, का समय है मिलमिलाप का समय नहीं

8=बीमारियां बड़ी

9=टेंशन बड़ा

10= पैसे है पर शारीरिक सुख नहीं

11=बडापन बड़ा

12=दिखावा बड़ा

13=भद्दापन बड़ा

14=वृद्धा आश्रम बड़े

15=जूठ बड़ा

16=पाप बड़ा

17=हल्का पन बड़ा

18=झगड़े बड़े

19=नंगा पन बड़ा

20=राग, द्वेष बड़ा

21=ईर्ष्या बड़ी

22= छोटा पन बड़ा

23= छोटी सोच बड़ी

24= लालच बड़ा

वास्तविकता आज की  🌹🙏

आप सभी इन बातों पर  ध्यान दें ताकि हम सभी कलयुग के प्रभाव को कम कर सकें !

पोस्ट अच्छी लगी हो पोस्ट अच्छी लगे हो तो कृपया दूसरे के साथ शेयर करें ताकि लोगों को कलयुग के बारे में पता चल सके!