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शनिवार, 23 जुलाई 2022

आयुर्वेदिक दोहे के माध्यम से उपचार विधि

 ۞ ∥ आयुर्वेदिक दोहे ∥ ۞


१Ⓜदही मथें माखन मिले, 

         केसर संग मिलाय,

होठों पर लेपित करें, 

रंग गुलाबी आय..


२Ⓜबहती यदि जो नाक हो, 

           बहुत बुरा हो हाल,

यूकेलिप्टिस तेल लें, 

सूंघें डाल रुमाल..


३Ⓜअजवाइन को पीसिये , 

           गाढ़ा लेप लगाय,

चर्म रोग सब दूर हो, 

तन कंचन बन जाय..


४Ⓜअजवाइन को पीस लें , 

        नीबू संग मिलाय,

फोड़ा-फुंसी दूर हों, 

सभी बला टल जाय..


५Ⓜअजवाइन-गुड़ खाइए, 

        तभी बने कुछ काम,

पित्त रोग में लाभ हो, 

पायेंगे आराम..


६Ⓜठण्ड लगे जब आपको, 

             सर्दी से बेहाल,

नीबू मधु के साथ में, 

अदरक पियें उबाल..


७Ⓜअदरक का रस लीजिए. 

            मधु लेवें समभाग,

नियमित सेवन जब करें, 

सर्दी जाए भाग..


८Ⓜरोटी मक्के की भली, 

        खा लें यदि भरपूर,

बेहतर लीवर आपका, 

टी.बी भी हो दूर..


९Ⓜगाजर रस संग आँवला, 

        बीस औ चालिस ग्राम,

रक्तचाप हिरदय सही, 

पायें सब आराम..


१०Ⓜशहद आंवला जूस हो, 

          मिश्री सब दस ग्राम,

बीस ग्राम घी साथ में, 

यौवन स्थिर काम..


११Ⓜचिंतित होता क्यों भला, 

           देख बुढ़ापा रोय,

चौलाई पालक भली, 

यौवन स्थिर होय..


१२Ⓜलाल टमाटर लीजिए, 

          खीरा सहित सनेह,

जूस करेला साथ हो, 

दूर रहे मधुमेह..


१३Ⓜप्रातः संध्या पीजिए, 

          खाली पेट सनेह, 

जामुन-गुठली पीसिये, 

नहीं रहे मधुमेह..


१४Ⓜसात पत्र लें नीम के, 

          खाली पेट चबाय, 

दूर करे मधुमेह को, 

सब कुछ मन को भाय..


१५Ⓜसात फूल ले लीजिए, 

          सुन्दर सदाबहार,

दूर करे मधुमेह को, 

जीवन में हो प्यार..


१६Ⓜतुलसीदल दस लीजिए, 

          उठकर प्रातःकाल,

सेहत सुधरे आपकी, 

तन-मन मालामाल..


१७Ⓜथोड़ा सा गुड़ लीजिए, 

          दूर रहें सब रोग,

अधिक कभी मत खाइए, 

चाहे मोहनभोग..


१८Ⓜअजवाइन और हींग लें, 

          लहसुन तेल पकाय,

मालिश जोड़ों की करें, 

दर्द दूर हो जाय..


१९Ⓜऐलोवेरा-आँवला, 

          करे खून में वृद्धि, 

उदर व्याधियाँ दूर हों,

जीवन में हो सिद्धि..


२०Ⓜदस्त अगर आने लगें, 

          चिंतित दीखे माथ,

दालचीनि का पाउडर, 

लें पानी के साथ..


२१Ⓜमुँह में बदबू हो अगर, 

          दालचीनि मुख डाल,

बने सुगन्धित मुख, महक, 

दूर होय तत्काल..


२२Ⓜकंचन काया को कभी, 

          पित्त अगर दे कष्ट,

घृतकुमारि संग आँवला, 

करे उसे भी नष्ट..


२३Ⓜबीस मिली रस आँवला, 

          पांच ग्राम मधु संग, 

सुबह शाम में चाटिये, 

बढ़े ज्योति सब दंग..


२४Ⓜबीस मिली रस आँवला, 

         हल्दी हो एक ग्राम,

सर्दी कफ तकलीफ में, 

फ़ौरन हो आराम..


२५Ⓜनीबू बेसन जल शहद, 

          मिश्रित लेप लगाय,

चेहरा सुन्दर तब बने, 

बेहतर यही उपाय..


२६.Ⓜमधु का सेवन जो करे, 

           सुख पावेगा सोय,

कंठ सुरीला साथ में, 

वाणी मधुरिम होय..


२७.Ⓜपीता थोड़ी छाछ जो, 

          भोजन करके रोज,

नहीं जरूरत वैद्य की, 

चेहरे पर हो ओज..


२८Ⓜठण्ड अगर लग जाय जो 

         नहीं बने कुछ काम, 

नियमित पी लें गुनगुना, 

पानी दे आराम..


२९Ⓜकफ से पीड़ित हो अगर, 

         खाँसी बहुत सताय,

अजवाइन की भाप लें, 

कफ तब बाहर आय..


३०Ⓜअजवाइन लें छाछ संग              

          मात्रा पाँच गिराम, 

कीट पेट के नष्ट हों, 

जल्दी हो आराम..


३१Ⓜछाछ हींग सेंधा नमक,

          दूर करे सब रोग,

जीरा उसमें डालकर, 

पियें सदा यह भोग..।


☝.  कृपया इस मैसेज को

         अपने परीजनो और 

           अपने मित्र गण से 

               अवगत कराए.

शनिवार, 16 जुलाई 2022

जीवन से जुड़े वेदों के 15 श्लोक



*जीवन से जुड़े वेदों के 15 श्लोक....*


*🚩🕉️श्लोक : ।।यथा द्यौश्च पृथिवी च न बिभीतो न रिष्यतः। एवा मे प्राण मा विभेः।।1।।- अथर्ववेद*


*🚩🕉️अर्थ : जिस प्रकार आकाश एवं पृथ्वी न भयग्रस्त होते हैं और न इनका नाश होता है, उसी प्रकार हे मेरे प्राण! तुम भी भयमुक्त रहो।*

 

*🚩🕉️अर्थात व्यक्ति को कभी किसी भी प्रकार का भय नहीं पालना चाहिए। भय से जहां शारीरिक रोग उत्पन्न होते हैं वहीं मानसिक रोग भी जन्मते हैं। डरे हुए व्यक्ति का कभी किसी भी प्रकार का विकास नहीं होता। संयम के साथ निर्भिकता होना जरूरी है। डर सिर्फ ईश्वर का रखें।* 

 

*🚩🕉️श्लोक : ।।अलसस्य कुतः विद्या अविद्यस्य कुतः धनम्। अधनस्य कुतः मित्रम् अमित्रस्य कुतः सुखम्।।*


*🚩🕉️अर्थ : आलसी को विद्या कहां, अनपढ़ या मूर्ख को धन कहां, निर्धन को मित्र कहां और अमित्र को सुख कहां।*

 

*🚩🕉️श्लोक : आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपु:। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।।*


*🚩🕉️अर्थात् : मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही (उनका) सबसे बड़ा शत्रु होता है। परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा) कोई अन्य मित्र नहीं होता, क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता।*

 

*🚩🕉️श्लोक : ।।सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव संपदः।।*


*🚩🕉️अर्थ : अचानक (आवेश में आकर बिना सोचे-समझे) कोई कार्य नहीं करना चाहिए, कयोंकि विवेकशून्यता सबसे बड़ी विपत्तियों का घर होती है। (इसके विपरीत) जो व्यक्ति सोच-समझकर कार्य करता है, गुणों से आकृष्ट होने वाली मां लक्ष्मी स्वयं ही उसका चुनाव कर लेती है।*

 

*🚩🕉️श्लोक : ।।शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।। -उपनिषद्*


*🚩🕉️अर्थ : शरीर ही सभी धर्मों (कर्तव्यों) को पूरा करने का साधन है।*


*🚩🕉️अर्थात : शरीर को सेहतमंद बनाए रखना जरूरी है। इसी के होने से सभी का होना है अत: शरीर की रक्षा और उसे निरोगी रखना मनुष्य का सर्वप्रथम कर्तव्य है। पहला सुख निरोगी काया।*

 

*🚩🕉️श्लोक : ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत। (सामवेद 11.5.19)*


*🚩🕉️अर्थ : ब्रह्मचर्य के तप से देवों ने मृत्यु पर विजय प्राप्त की।*


*🚩🕉️अर्थात : मानसिक और शारीरिक शक्ति का संचय करके रखना जरूरी है। इस शक्ति के बल पर ही मनुष्य मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकता है। शक्तिहिन मनुष्य तो किसी भी कारण से मुत्यु को प्राप्त कर जाता है।* *ब्रह्मचर्य का अर्थ और इसके महत्व को समझना जरूरी है।*


*🚩🕉️श्लोक : ।। गुणानामन्तरं प्रायस्तज्ञो वेत्ति न चापरम्। मालतीमल्लिकाऽऽमोदं घ्राणं वेत्ति न लोचनम्।।* 


*🚩🕉️अर्थ  : गुणों, विशेषताओं में अंतर प्रायः विशेषज्ञों, ज्ञानीजनों द्वारा ही जाना जाता है, दूसरों के द्वारा कदापि नहीं। जिस प्रकार चमेली की गंध नाक से ही जानी जा सकती है, आंख द्वारा कभी नहीं।* 

 

*🚩🕉️श्लोक : ।। येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मृत्युलोके भुवि भारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।।*

*🚩🕉️अर्थ : जिसके पास विद्या, तप, ज्ञान, शील, गुण और धर्म में से कुछ नहीं वह मनुष्य ऐसा जीवन व्यतीत करते हैं जैसे एक मृग।*


*🚩🕉️अर्थात : जिस मनुष्य ने किसी भी प्रकार से विद्या अध्ययन नहीं किया, न ही उसने व्रत और तप किया, थोड़ा बहुत अन्न-वस्त्र-धन या विद्या दान नहीं दिया, न उसमें किसी भी प्राकार का ज्ञान है, न शील है, न गुण है और न धर्म है। ऐसे मनुष्य इस धरती पर भार होते हैं। मनुष्य रूप में होते हुए भी पशु के समान जीवन व्यतीत करते हैं।*

 

 *🚩🕉️कुछ प्रचलित महत्वपूर्ण संस्कृत वाक्य...*

 

*🚩🕉️अति सर्वत्र वर्जयेत्।* *अर्थात : अधिकता सभी जगह बुरी होती है।*


*🚩🕉️कालाय तस्मै नमः।।*

*कालेन समौषधम्।। समय सबसे बेहतर मरहम लगाने वाला है।*


*🚩🕉️जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।* *अर्थात: जहां आपने जन्म लिया है वह स्वर्ग से भी बड़ी भूमि है। उसके प्रति वफादारी जरूरी है।*


*🚩🕉️दुर्लभं भारते जन्म मानुष्यं तत्र दुर्लभम्।।* 

*अर्थात मनुष्यों के लिए भारत में जन्म लेना सबसे दुर्लभ है। भाग्यशाली है जिन्होंने भारत में जन्म लिया।*


*🚩🕉️नास्ति सत्यसमो धर्मः।।*  *अर्थात: सत्य के बराबर कोई दूसरा धर्म नहीं।*


*🚩🕉️बुद्धिः कर्मानुसारिणी।। अर्थात बुद्धि कर्म का अनुसरण करती है।*


*🚩🕉️बुद्धिर्यस्य बलं तस्य।।  बुद्धि तलवार से अधिक शक्तिशाली है।*


*🚩पितृदेवो भव।।*

*🚩आचार्यदेवो भव।।*

*🚩अतिथिदेवो भव।।*

*🚩मूढः परप्रत्यनेयबुद्धिः।।*

*🚩विनाशकाले विपरीतबुद्धि।।*


*🚩🌺समाप्त🚩🌺* 


🚩🌺🕉️🏵️🚩🌺🕉️🏵️🚩

सोमवार, 11 जुलाई 2022

किस रोग में कौन सा रस,औसधियाँ लेंगे

 किस रोग में कौन सा रस लेंगे ?*


*सात्विक जीवन शैली* जूस चिकित्सा

भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। 


खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव नमक के साथ लें।


*कब्ज* : सफेद पेठा, नाशपाती, बेल, anar, गन्ना, संजीवनी जूस, अमला |


*रक्तशुद्धिः* नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस।


*दमाः* लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है।


*उच्च रक्तचापः* गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है।


*निम्न रक्तचापः* मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस अथवा दूध भी लाभदायक है।


*पीलियाः* अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें।


*मुहाँसों के दागः* गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस।


*संधिवातः* लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे।


*एसीडिटीः* गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है।


*कैंसरः* गेहूँ के ज्वारे, गाजर , सफेद पेठा, बेल पत्र + गोमूत्र और अंगूर का रस।


*सुन्दर बनने के लिएः* सुबह-दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा साफ करें।


*फोड़े-फुन्सियाँ-* गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी और नारियल का रस।


*कोलाइटिसः* गाजर, पालक , पत्तागोभी और पाइनेपल का रस। 70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण। चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है।


*अल्सरः* अंगूर, गाजर, गोभी का रस। केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है।


*सर्दी-कफः* मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप।


*ब्रोन्काइटिसः* पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का सूप। स्टार्चवाली खुराक वर्जित।


*दाँत निकलते बच्चे के लिएः* पाइनेपल का रस थोड़ा नींबू डालकर रोज चार औंस(100-125 ग्राम)।


*रक्तवृद्धि के लिएः* मोसम्मी, अंगूर, पालक, टमाटर, चुकन्दर, सेब , रसभरी का रस रात को। रात को भिगोया हुआ खजूर का पानी सुबह में। इलायची के साथ केले भी उपयोगी हैं।


*स्त्रियों को मासिक धर्म कष्टः* अंगूर, पाइनेपल , गाजर, सेब, चुकंदर, तथा रसभरी का रस।


*आँखों के तेज के लिएः* गाजर का रस तथा हरे धनिया का रस श्रेष्ठ है।


*अनिद्राः* अंगूर और सेब का रस। पीपरामूल शहद के साथ।


*वजन बढ़ाने के लिएः* पालक, गाजर, चुकन्दर, नारियल और गोभी के रस का मिश्रण, दूध, दही, सूखा मेवा, अंगूर और सेवों का रस।


*डायबिटीजः* गोभी, गाजर, लौकी, नारियल, करेला और पालक का रस।


*पथरीः* पत्तों वाली भाजी न लें। ककड़ी का रस श्रेष्ठ है। सेब अथवा गाजर या कद्दू का रस भी सहायक है। जौ एवं सहजने का सूप भी लाभदायक है।


*सिरदर्दः* ककड़ी, चुकन्दर, गाजर, गोभी और नारियल के रस का मिश्रण।


*किडनी का दर्दः* गाजर, पालक, ककड़ी, अदरक और नारियल का रस।


*फ्लूः* अदरक, तुलसी, गाजर का रस।


*वजन घटाने के लिएः* पाइनेपल, गोभी, तरबूज का रस, नींबू का रस।


*पायरियाः* गेहूँ के ज्वारे, गाजर, नारियल, ककड़ी, पालक और सुआ की भाजी का रस। कच्चा अधिक खायें।


*बवासीरः* मूली का रस,  amla रस, बेल, नाशपाती, लौकी , गन्ना।


*डिब्बेपैक फलों के रस से बचोः*


बंद डिब्बों का रस भूलकर भी उपयोग में न लें। उसमें बेन्जोइक एसिड होता है। यह एसिड तनिक भी कोमल चमड़ी का स्पर्श करे तो फफोले पड़ जाते हैं। और उसमें उपयोग में लाया जानेवाला सोडियम बेन्जोइक नामक रसायन यदि कुत्ता भी दो ग्राम के लगभग खा ले तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। उपरोक्त रसायन फलों के रस, कन्फेक्शनरी, अमरूद, जेली, अचार आदि में प्रयुक्त होते हैं। उनका उपयोग मेहमानों के सत्कारार्थ या बच्चों को प्रसन्न करने के लिए कभी भूलकर भी न करें।


'फ्रेशफ्रूट' के लेबल में मिलती किसी भी बोतल या डिब्बे में ताजे फल अथवा उनका रस कभी नहीं होता। बाजार में बिकता ताजा 'ओरेन्ज' कभी भी संतरा-नारंगी का रस नहीं होता। उसमें चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम रंग ही प्रयुक्त होते हैं जो आपके दाँतों और आँतड़ियों को हानि पहुँचा कर अंत में कैंसर को जन्म देते हैं। बंद डिब्बों में निहित फल या रस जो आप पीते हैं उन पर जो अत्याचार होते हैं वे जानने योग्य हैं। सर्वप्रथम तो बेचारे फल को उफनते गरम पानी में धोया जाता है। फिर पकाया जाता है। ऊपर का छिलका निकाल लिया जाता है। इसमें चाशनी डाली जाती है और रस ताजा रहे इसके लिए उसमें विविध रसायन (कैमीकल्स) डाले जाते हैं। उसमें कैल्शियम नाइट्रेट, एलम और मैग्नेशियम क्लोराइड उडेला जाता है जिसके कारण अँतड़ियों में छेद हो जाते हैं, किडनी को हानि पहुँचती है, मसूढ़े सूज जाते हैं। जो लोग पुलाव के लिए बाजार के बंद डिब्बों के मटर उपयोग में लेते हैं उन्हें हरे और ताजा रखने के लिए उनमें मैग्नेशियम क्लोराइड डाला जाता है। मक्की के दानों को ताजा रखने के लिए सल्फर डायोक्साइड नामक विषैला रसायन (कैमीकल) डाला जाता है। एरीथ्रोसिन नामक रसायन कोकटेल में प्रयुक्त होता है। टमाटर के रस में नाइट्रेटस डाला जाता है। शाकभाजी के डिब्बों को बंद करते समय शाकभाजी के फलों में जो नमक डाला जाता है वह साधारण नमक से 45 गुना अधिक हानिकारक होता है।


स्वस्थ् जीवन की कला


🙏🏼🍈🍎🍉🌱

शनिवार, 9 जुलाई 2022

स्वास्थ्य दोहावली

 *स्वास्थ्य दोहावली*

पानी में गुड़ डालिए,

बीत जाए जब रात.!

सुबह छानकर पीजिए,

अच्छे हों हालात.!!


धनिया की पत्ती मसल,

बूंद नैन में डार.!

दुखती अँखियां ठीक हों,

पल लागे दो-चार.!!


ऊर्जा मिलती है बहुत,

पिएं गुनगुना नीर.!

कब्ज खतम हो पेट की,

मिट जाए हर पीर.!!


प्रातः काल पानी पिएं,

घूंट-घूंट कर आप.!

बस दो-तीन गिलास है,

हर औषधि का बाप.!!


ठंडा पानी पियो मत,

करता क्रूर प्रहार.!

करे हाजमे का सदा,

ये तो बंटाढार.!!


भोजन करें धरती पर,

अल्थी पल्थी मार.!

चबा-चबा कर खाइए,

वैद्य न झांकें द्वार.!!


सुबह सुबह फल रस लो,

दुपहर लस्सी-छांस.!

सदा रात में दूध पी,

सभी रोग का नाश.!!


प्रात, दोपहर लीजिये,

जब नियमित आहार.!                                                  तीस मिनट की नींद लो,

रोग न आवें द्वार.!!


भोजन करके रात में,

घूमें कदम हजार.!

डाक्टर, ओझा, वैद्य का,

लुट जाए व्यापार !!


घूट-घूट पानी पियो,

रह तनाव से दूर.!

एसिडिटी या मोटापा,

होवें चकनाचूर.!!


अर्थराइटिज या हार्निया,

अपेंडिक्स का त्रास!

पानी पीजै बैठकर,

कभी न आवें पास!!


रक्तचाप बढने लगे,

तब मत सोचो भाय.!

सौगंध राम की खाइ के,

तुरत छोड दो चाय.!!


सुबह खाइये कुवंर-सा,

दुपहर यथा नरेश.!

भोजन लीजै रात में,

जैसे रंक सुरेश.!!


देर रात तक जागना,

रोगों का जंजाल.!

अपच,आंख के रोगसँग,

तन भी रहे निढाल.!!


दर्द, घाव, फोड़ा, चुभन,

सूजन, चोट पिराइ.!

बीस मिनट चुंबक धरौ,

पिरवा जाइ हेराइ.!!


सत्तर रोगों कोे करे,

चूना हमसे दूर.!

दूर करे ये बाझपन,

सुस्ती अपच हुजूर.!!


भोजन करके जोहिए,

केवल घंटा डेढ.!

पानी इसके बाद पी,

ये औषधि का पेड.!!


अलसी, तिल, नारियल,

घी सरसों का तेल.!

यही खाइए नहीं तो,

हार्ट समझिए फेल.!!


सर्वोत्तम सेंधा नमक,

पहाड़ी नमक सु जान.!

श्वेत नमक है सागरी,

ये है जहर समान.!!


अल्यूमिनियम के पात्र का,

करता जो उपयोग.!

आमंत्रित करता सदा,

वह अडतालीस रोग.!!


फल या मीठा खाइके,

तुरत न पीजै नीर.!

ये सब छोटी आंत में,

बनते विषधर तीर.!!


चोकर खाने से सदा,

बढती तन की शक्ति.!

गेहूँ मोटा पीसिए,

दिल में बढे विरक्ति.!

कफ बाहर आ जाय.!

बने सुरीला कंठ भी,

सबको लगत सुहाय.!!


भोजन करके खाइए,

सौंफ, गुड़, अजवाइन.!

पत्थर भी पच जायगा,

जानै सकल जहान.!!


लौकी का रस पीजिए,

चोकर युक्त पिसान.!

तुलसी, गुड़, सेंधा नमक,

हृदय रोग निदान.!!


गुरुवार, 7 जुलाई 2022

वास्तव में मूत्र रोगी होकर यौन रोग जैसे लक्षण क्यूूं, दवा

 

वास्तव में मूत्र रोगी होकर यौन रोग जैसे लक्षण क्यूं , दवा

*यह लेख पढ़ना आपको असहज लग सकता है लेकिन आंखें खोलना चाहते हैं तो जरूर पढ़ें*❗❗

*कहीं आप वास्तव में मूत्र रोगी होकर यौन रोग जैसे लक्षणों के कारण यौन रोगों की दवाएं तो नही खा रहे❓❓*

*भारी-भरकम विज्ञापन या स्वयंभू चिकित्सकों के आकर्षण में कई बार आप अँग्रेजी साल्ट मिली तथाकथित दवायें तक खा रहे होते हैं जो बहुत घातक सिद्ध होता है❗❗*


❣ *ऐसा बहुत देखने को मिलता है कि कुछ मूत्र रोगों या विशेष यौनिक स्थितियों/ कारणों में चिकित्सक द्वारा आपके मूत्र रोग या अन्य किसी रोग को यौन रोग की तरह प्रदर्शित कर गैर-जरूरी दवाएं खिलाई जाती हैं व गैर-जरूरी खर्च वसूला जाता है।*


❣ *मुख्यतः 13 प्रकार के ऐसे मूत्र रोग हैं जिनके लक्षण यौन रोगों जैसे हो सकते हैं व इनका इलाज मूत्र रोगों के अंतर्गत हो तो ही उत्तम लाभ मिलता है, बहुत बार जानबूझकर या सटीक ज्ञान न होने के कारण कुछ चिकित्सकों द्वारा ऐसे मूत्र रोगों का इलाज केवल यौन रोगों के अंतर्गत किया जाता रहता है जिस कारण से वाकई में न ही यह मूत्र रोग ठीक होता है और न ही यौन रोगों जैसे लक्षण।।*


❣ *मर्यादित व विज्ञान आधारित चिकित्सा शैली के अंतर्गत हम हमेशा कोशिश करते आये हैं कि मुख्यतः जटिल से जटिल मूत्र रोगों के विभिन्न पहलुओं से जन-मानस को रु-ब-रु कराते रहें।यौन रोगों का संबंध अनेकों परिपेक्ष में मूत्र रोगों के साथ होता ही है जिस कारण से हर वर्ष हम सफलतापूर्वक ऐसे सैंकड़ों रोगियों का इलाज करते हैं जो चिकित्सक या स्वयं की अनभिज्ञता के कारण केवल यौन रोगों का इलाज/दवा खा रहे होते हैं व इसलिए लाभ नहीँ मिलता।।*

*यह भी समझना बहुत जरूरी है कि केवल दवा खाने और दक्ष चिकित्सक की देख रेख में इलाज कराने में बहुत बड़ा फ़र्क़ है।।*



मंगलवार, 5 जुलाई 2022

संतुलन बराबर रखना,(महाभारत प्रसंग )

द्रौपदी के स्वयंवर (महाभारत प्रसंग )

द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त श्री कृष्ण" ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना,संतुलन बराबर रखना, लक्ष्य मछली की आंख पर ही केंद्रित हो उसका खास खयाल रखना, तो अर्जुन ने कहा, "हे प्रभु " सबकुछ अगर मुझे ही करना है, तो फिर आप क्या करोगे???

वासुदेव हंसते हुए बोले, हे पार्थ जो आप से नहीं होगा वह मै करुंगा, 

पार्थ ने कहा प्रभु ऐसा क्या है जो मैं नहीं कर सकता??? 

वासुदेव फिर हंसे और बोले, जिस अस्थिर, विचलित, हिलते हुए पानी में तुम मछली का निशाना साधोगे , उस विचलित "पानी" को स्थिर "मैं" रखुंगा !!

कहने का तात्पर्य यह है कि, आप चाहे कितने ही निपुण क्यूँ ना हो , कितने ही बुद्धिवान, महान एवं विवेकपूर्ण क्यूँ ना हो, आप स्वंय हर एक परिस्थिति के ऊपर पूर्ण नियंत्रण नहीँ रख सकते .. 

आप सिर्फ अपना प्रयास कर सकते है, लेकिन उसकी भी एक सीमा है और जो उस सीमा से आगे की बागडोर संभलता है उसी का नाम "विधाता" है ...

रविवार, 3 जुलाई 2022

गोलगप्पे खाइये

            गोलगप्पे खाइये

       

" बडा आदमी.....

तुम्हे कुछ दिन से देख रहा हूं...

यहां रोज गोलगप्पे की रेहड़ी लगाते हो ....

स्कूल क्यों नहीं जाते....

शर्मा जी ने सड़क किनारे रेहड़ी लगाए 15-16 साल के लड़के से कहा...


"बस अंकल जी...अपनी हालत कुछ ऐसी ही है ...


" मै एक संस्था चलाता हूं... 

यहा गरीब बच्चों के लिए कक्षाएं चलाई जाती है...

तुम भी आ सकते हो....


" अंकल जी....फिर गोलगप्पे कौन बेचेगा... 

घर कैसे चलेगा....

क्यो.... तुम्हारे माता -पिता नही है क्या....

"है.... अंकल जी ....भाई है बहन भी है...

पर घर की जिम्मेदारी मुझ पर है

वैसे भी पढ़ -लिख कर क्या करूँगा

 

 पढ़ कर तुम बड़े आदमी बन सकते हो....


लड़का ज़ोर से हंसा -अंकल जी ...

बड़ा आदमी ....वो सूट बूट वाला 

जो गरीब मां -बाप से किनारा कर लेता है ....

सुनिए अंकल जी -- मेरे बापू चपरासी थे...

मामूली तनख्वाह थी हम दो भाई ,एक बहन है...

बापू ने बड़ी मेहनत से भाई ,बहन को पढ़ाया...कर्ज़ा लिया ...

फिर भाई अफसर बन गया...कालेज में अपनी पसंद की लडकी से शादी की और पत्नी को साथ ले विदेश निकल गया...

पलट कर  देखा तक नही....

बहन बड़े स्कूल की प्रिंसिपल है ।

उसे व उसके पति को...

चपरासी पिता ...

अनपढ़ मां ..

और सिर्फ छठी पास भाई धब्बा लगते है...

कभी मिलने नही आती ...

"उनकी बड़ी शिक्षा पर हम पैबंद से लगते है....

" अब बापू का काम नहीं रहा ...

मां बीमार रहती है...

मैं घर चलाउ या पढूं ....

"वैसे भी अंकल जी , ...

आदमी सोच से बड़ा होता है ,डिग्रियों से नहीं !"

" मैं तो एक ही पढ़ाई जानता हूँ --

जिन माता -पिता ने कष्ट सह कर पाला...

उन्हें सुख दे सकूं तभी खुद को बड़ा आदमी मानूँगा...

भले ही कितने पथरीले रास्तों के धूल ,कंकर सहने पड़े....

"चलिए अंकल जी ...

गोलगप्पे खाइये...

कुछ कमाई तो हो ....

जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

 *जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी मान्यताएं*---

भगवान की लीला को आजतक कोई भी पूरी तरह से समझ नहीं पाया है, लेकिन उनकी अद्भुत लीलाओं के कुछ उदाहरण ज़रूर हमें विभिन्न स्थानों पर देखने को मिल जाते हैं। ऐसे ही पवित्र स्थानों में से एक है भगवान जगन्नाथ जी का मंदिर।


मान्यताओं के अनुसार, यहां आज भी भगवान श्रीकृष्ण का हृदय धड़कता है। जगन्नाथ पुरी से जुड़ी ऐसी कई मान्यताएं हैं, जो हमें ईश्वर की उपस्थिति का वास्तविक अनुभव करवाती हैं। आज हम उन सभी मान्यताओं के बारे में इस लेख में बात करेंगे, साथ ही हम आपको इस मंदिर से जुड़े हुए तथ्यों के बारे में भी बताएंगे-


सबसे पहले जगन्नाथ मंदिर की ऊंचाई के बारे में बात करें तो इसकी ऊंचाई 214 फुट है और ये 4 लाख वर्ग फुट तक फैला हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि इस भव्य मंदिर के गुंबद की छाया दिन के समय में कभी भी नहीं बनती है। इसके शीर्ष पर एक सुदर्शन चक्र लगा हुआ है। जिसे पुरी में किसी भी स्थान से देखने पर वो हमेशा एक समान ही दिखाई पड़ता है। इससे ये कहा जा सकता है कि यह मंदिर आस्था का मुख्य केंद्र होने के साथ, वास्तुकला का भी बेहतरीन उदाहरण है।

इसके अलावा मंदिर के ऊपर ध्वज स्थापित किया गया है। इस ध्वज की खास बात ये है कि ये सदैव हवा से विपरीत दिशा में ही लहराता है। जिसे प्रतिदिन सायंकाल के समय लोगों द्वारा 45 मंजिल उल्टा चढ़कर बदला जाता है।


मंदिर का मुख्य द्वार सिंहद्वार है। इस दरवाजे से प्रवेश करने के बाद लहरों की आवाज़ स्पष्ट रूप से सुनाई देती है, लेकिन सिंह द्वार के प्रवेश द्वार से मंदिर के अंदर आ जाने के बाद समुद्र की लहरों का शोर बिल्कुल भी सुनाई नहीं देता है। वहीं मंदिर के बाहर आने पर फिर से लहरों की आवाज़ सुनाई देने लग जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह दो प्रभुओं की बहन सुभद्रा माई की इच्छा थी, जिन्होंने मंदिर के द्वार के भीतर शांति की कामना की थी, जिसे भगवान द्वारा विधिवत पूरा भी किया गया।

श्री जगन्नाथ मंदिर में स्थित रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है। इस रसोई में हर दिन 500 के करीब रसोइए और 300 के आस पास सहयोगी भोजन बनाते हैं। प्रसाद बनाने के लिए एक के ऊपर एक 7 बरतनों को रखा जाता है। आपको ये जानकर भी हैरानी होगी जो पात्र सबसे ऊपर रखा होता है उसमें भोजन सबसे पहले बनता है और फिर उसके नीचे वाले पात्र में बनता है, और जिस पात्र में सबसे ज्यादा आंच पड़ रही है यानी कि सबसे नीचे उसमें सबसे बाद में भोजन बनकर तैयार होता है।साथ ही, इस मंदिर से जुड़ी एक और रोचक बात यह है कि इसके गुंबदों पर आपको एक भी पक्षी नहीं दिखेगा। इस मंदिर के ऊपर भी पक्षी या हवाई जहाज उड़ते हुए नज़र नहीं आते हैं।


इस मंदिर से जुड़ी हुई सबसे दिलचस्प मान्यता यह है कि यहां पर श्रीकृष्ण का हृदय, ब्रह्म पदार्थ के रूप में मौजूद है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब श्री कृष्ण की लीला अवधि पूर्ण हुई तो वे देह त्याग कर बैकुंठ चले गए। उनके पार्थिव शरीर का पांडवों ने दाह संस्कार किया। लेकिन शरीर ब्रह्मलीन होने के बाद भी भगवान का हृदय जलता ही रहा। तब उनके हृदय को जल में प्रवाहित कर दिया। जल में हृदय ने लट्ठे का रूप धारण कर लिया और उड़ीसा के समुद्र तट पर पहुंच गया!

इस प्रक्रिया में भगवान जगन्नाथ व अन्य मूर्तियों को बारह वर्षों बाद बदला जाता है। तब पूरे शहर में बिजली बंद करके अंधेरा कर दिया जाता है। यहां तक की मंदिरों में भी अंधेरा कर दिया जाता है। इसके पश्चात नवकलेवर नामक एक अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान के तहत, चुनिंदा पुजारियों की आंखों पर पट्टियां बांधकर मंदिर में भेजा जाता है, और वह इन मुर्तियों में से ब्रह्म पदार्थ निकाल कर नई मूर्तियों में सावधानी पूर्वक स्थापित कर देते हैं।


यह पदार्थ वास्तविकता में क्या है, ये आज भी एक रहस्य बना हुआ है। लेकिन इन सब मान्यताओं के कारण, यहां पर लोगों की आस्था निहित है और दूर-दराज से लोग यहां पर अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। अगर आपको भी मौका मिले तो इस शुभ यात्रा का हिस्सा अवश्य बनें।

शुक्रवार, 1 जुलाई 2022

थूकेगा इतिहास तुम्हारी चुप्पी या नादानी पर

 थूकेगा इतिहास तुम्हारी

 चुप्पी या नादानी पर

🙊🙈🙉🙊🙈🙉


कैसे गर्व करे भारत मां, 

हिंदू-हिंदुस्तानी पर?

थूकेगा इतिहास तुम्हारी,

 चुप्पी या नादानी पर।


कभी संत की हत्या होती,

 साधू मारे जाते हैं,

कभी कन्हैया के तन से ही,

 शीश उतारे जाते हैं,

घाटी में हिंदू के घर,

चुन-चुन हत्यारे आते हैं,

अस्सी प्रतिशत होकर भी,

 हम ही संहारे जाते हैं,


कब जागोगे सोने वालों,

तुम इनकी शैतानी पर ?

थूकेगा इतिहास तुम्हारी,

 चुप्पी या नादानी पर।


'धड़ से शीश जुदा', का नारा,

 सिर पर चढ़कर बोलेगा ,

अंकित या कमलेश तिवारी,

 की हत्या कर तोलेगा,

पाकिस्तानी नारों से,

हम सबके दिल को छोलेगा,

वीर शिवा-राणा के वंशज,

 खून भला कब खौलेगा?


बाबू सेकुलर गर्व करेंगे,

 कातिल अफ़ज़ल-बानी पर।

थूकेगा इतिहास तुम्हारी,

 चुप्पी या नादानी पर।


भारत मां के बंटवारे में,

 यदि ना चूक किए होते,

सन सैंतालिस में ही निर्णय,

 तुम दो टूक किए होते,

सावन-भादौं की नदियों में,

 ज्यों कुत्ते बह जाते हैं,

ये भी बह जाते,तुम केवल,

 मिलकर थूक दिए होते,


पानी फिर ना जाए बोस,

भगत सिंह की कुर्बानी पर।

थूकेगा इतिहास तुम्हारी,

 चुप्पी या नादानी पर।


गंगा-जमुनी,भाईचारा,

 सेकुलर केवल नारे हैं,

जब तक हम बहुमत में हैं, 

केवल तब तक ही प्यारे हैं,

उनके बच्चों को भी मालुम, 

कौन हमारा दुश्मन है?

अपने 'बावन' वाले भी,

कहते हैं "सभी हमारे हैं"।


उनकी देशभक्ति है जैसे,

 'पानी लिखना पानी पर।

थूकेगा इतिहास तुम्हारी,

 चुप्पी या नादानी पर


नेताओं ने वोटों की ,

माया में तुम्हें फंसाया है,

जातिवाद के चक्कर में,

 तुमको कमजोर बनाया है,

बाभन, ठाकुर,अगड़ा-पिछड़ा, 

दलित बनाकर बांट दिए,

जहां पड़े वह बीस पीसकर,

 हमको सबक सिखाया है,


किए भरोसा अब भी बाबू,

 जेहादी बिरियानी पर।

थूकेगा इतिहास तुम्हारी,

 चुप्पी या नादानी पर।


कसम विवेकानंद -बोस की,

 कसम तुम्हें सावरकर की,

जाति-पांति का दहन करो अब, 

लाज बचाओ सरवर की,

जिस दिन मुट्ठी बंध जाएगी,

 सनातनी फुलवारी की,

साहस नहीं करेगा कोई,

 टहनी तोड़ें तरुवर की।


वरना काटे जाओगे,

आपस की खींचातानी पर।

थूकेगा इतिहास तुम्हारी

 चुप्पी या नादानी पर।


सुरेश मिश्र