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सोमवार, 28 फ़रवरी 2022

महर्षि दयानन्द सरस्वती एक परिचय



महर्षि दयानन्द सरस्वती एक परिचय 

            *(फाल्गुन कृष्ण दशमी/ जन्मोत्सव)*

                  महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी (12 फरवरी,1824) को टंकारा में मोरबी (मुम्बई की मोरवी रियासत) के पास काठियावाड़ क्षेत्र (जिला राजकोट), गुजरात में हुआ था. पिता का नाम कृष्ण जी लाल जी तिवारी और माता का नाम यशोदाबाई था. उनके पिता एक कर-कलेक्टर होने के साथ ब्राह्मण परिवार के एक समृद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति थे.

                  स्वामी दयानन्द आधुनिक भारत के महान चिन्तक, समाज-सुधारक, तथा आर्य समाज के संस्थापक थे. उनके बचपन का नाम *मूलशंकर* था.

                 उन्होंने वेदों के प्रचार और आर्यावर्त को स्वतन्त्रता दिलाने के लिए मुम्बई में *आर्यसमाज* की स्थापना की. वे एक संन्यासी तथा एक चिन्तक थे. उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना. *वेदों की ओर लौटो* यह उनका प्रमुख नारा था. 

                  स्वामी दयानंद ने वेदों का भाष्य किया इसलिए उन्हें *ऋषि* कहा जाता है क्योंकि *ऋषयो मन्त्र दृष्टारः* (वेदमन्त्रों के अर्थ का दृष्टा ऋषि होता है) उन्होने *कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य तथा सन्यास* को अपने दर्शन के *चार स्तम्भ* बनाया. उन्होने ही सबसे पहले 1876 में *स्वराज्य* का नारा दिया जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया.

                  स्वामी दयानन्द के विचारों से प्रभावित महापुरुषों की संख्या असंख्य है, इनमें प्रमुख नाम हैं- *मादाम भिकाजी कामा,भगत सिंह पण्डित लेखराम आर्य, स्वामी श्रद्धानन्द, चौधरी छोटूराम पण्डित गुरुदत्त विद्यार्थी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, विनायक दामोदर सावरकर, लाला हरदयाल, मदनलाल ढींगरा, राम प्रसाद बिस्मिल, महादेव गोविंद रानडे, महात्मा हंसराज, लाला लाजपत राय* इत्यादि. 

                  स्वामी दयानन्द के प्रमुख अनुयायियों में लाला हंसराज ने 1886 में *लाहौर* में *दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज* की स्थापना की तथा स्वामी श्रद्धानन्द ने 1901 में हरिद्वार के निकट *कांगड़ी* में *गुरुकुल* की स्थापना की.

                  शिवरात्रि के दिन उनके जीवन में नया मोड़ आया. उन्हें नया बोध हुआ. वे घर से निकल पड़े और यात्रा करते हुए वह *गुरु विरजानन्द* के पास पहुंचे. गुरुवर ने उन्हें *पाणिनी व्याकरण, पातंजल-योगसूत्र तथा वेद-वेदांग* का अध्ययन कराया.

                  उन्होंने अपने गुरु जी को दक्षिणा के रूप में लोंग भेंट स्वरूप दिये लेकिन गुरु विरजानन्द ने दक्षिणा में दयानन्द से मांगा-विद्या को सफल कर दिखाओ, परोपकार करो, सत्य शास्त्रों का उद्धार करो, मत मतांतरों की अविद्या को मिटाओ, वेद के प्रकाश से इस अज्ञान रूपी अन्धकार को दूर करो, वैदिक धर्म का आलोक सर्वत्र विकीर्ण करो. यही तुम्हारी गुरु दक्षिणा है. 

                  उन्होंने आशीर्वाद दिया कि ईश्वर उनके पुरुषार्थ को सफल करे. उन्होंने अन्तिम शिक्षा दी -मनुष्यकृत ग्रन्थों में ईश्वर और ऋषियों की निन्दा है, ऋषिकृत ग्रन्थों में नहीं. *वेद प्रमाण* हैं. इस कसौटी को हाथ से न छोड़ना. उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की. उन्होंने हरिद्वार में कुम्भ के अवसर पर *पाखण्ड खण्डिनी पताका* फहराई.  

                  उन्होंने अनेक शास्त्रार्थ किये. *सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्य* भूमिका सहित *चालीस पुस्तकों* की रचना और अनेक शास्त्रार्थों के रास्ते शास्त्रार्थ की वैदिक परम्परा को पुनः स्थापित करने का कार्य शंकराचार्य जी के पश्चात् महर्षि दयानन्द जी ने ही किया.

                  उन्होंने धर्म, अध्यात्म, वैदिक शिक्षा, भाषा, देश सेवा, समाज सेवा, ज्ञान-विज्ञान के प्रसार सहित *समाज, संस्कृति, धर्म और अध्यात्म* के विकास के कार्यों को *यज्ञ* कहकर उन्हें सुकर्म की प्रतिष्ठा दी.

                  *मानव मूल्यों की स्थापना हेतु उन्होंने अपने जीवन को सन्देश के रूप में प्रतिष्ठित किया. उन्होंने अपने विरोधियों, हत्यारों और घृणा करने वालों को क्षमा किया।*

आशाराम बापू ने वेलेंटाइन डे के दिन मातृ-पितृ पूजन क्यों शुरू किया जाए ?


आशाराम बापू ने वेलेंटाइन डे के दिन मातृ-पितृ पूजन क्यों शुरू किया जाए ?


🚩वेलेंटाइन डे पर 2006 से संत आशारामजी बापू ने मातृ-पितृ पूजन दिवस शुरू किया था। आज करोड़ों लोग इसको मना रहे हैं, लेकिन ऐसा क्या था जिसके कारण बापू आशारामजी को 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन शुरू करना पड़ा, उन्होंने इस बारे में क्या कहा था- आइए जानते हैं।


🚩बापू आशारामजी ने बताया था कि प्रेम-दिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर विनाशकारी कामविकार का विकास हो रहा है, जो आगे चलकर चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, खोखलापन, जल्दी बुढ़ापा और मौत लाने वाला साबित होगा। अतः भारतवासी इस अंधपरंपरा से सावधान हों!


🚩'इन्नोसन्टी रिपोर्ट कार्ड' के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं। उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं और 7 लाख 50 हजार कुँवारी मां बन जाती हैं। अमेरिका में हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं।


यौन संबन्ध करने वालों में 25% किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों से पीड़ित हैं। असुरक्षित यौन संबंध करने वालों में 50% को गोनोरिया, 33% को जैनिटल हर्पिस और एक प्रतिशत को एड्स का रोग होने की संभावना है। एड्स के नये रोगियों में 25%, 22 वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं। आज अमेरिका के 33% स्कूलों में यौन शिक्षा के अंतर्गत 'केवल संयम' की शिक्षा दी जाती है। इसके लिए अमेरिका ने 40 करोड़ से अधिक डॉलर (करीब 20 अरब रूपये) खर्च किये हैं।


🚩प्रेम दिवस जरूर मनायें लेकिन प्रेम दिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए। युवक युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा। इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें। संतान अपने माता-पिता के गले लगे। इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा। बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें।


🚩तुम भारत के लाल और भारत की लालियाँ (बेटियाँ) हो। प्रेमदिवस मनाओ, अपने माता-पिता का सम्मान करो और माता-पिता बच्चों को स्नेह करें। करोगे न बेटे, ऐसा! पाश्चात्य लोग विनाश की ओर जा रहे हैं। वे लोग ऐसे दिवस मनाकर यौन रोगों का घर बन रहे हैं, अशांति की आग में तप रहे हैं। उनकी नकल तो नहीं करोगे?


मेरे प्यारे युवक-युवतियों और उनके माता-पिता! आप भारतवासी हैं। दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों की संतान हैं। प्रेमदिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश हो, ऐसे दिवस का त्याग करके माता-पिता और संतानें प्रभु के नाते एक-दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें। काम विकार नहीं, रामरस, प्रभुप्रेम, प्रभुरस...


मातृदेवो भव। पितृदेवो भव। बालिकादेवो भव। कन्यादेवो भव। पुत्रदेवो भव।


माता पिता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा।


पाश्चात्यों का अनुकरण आप क्यों करो? आपका अनुकरण करके वे सद्भागी हो जायें।


🚩जो राष्ट्रभक्त नागरिक यह राष्ट्रहित का कार्य करके भावी सुदृढ़ राष्ट्र निर्माण में साझीदार हो रहे हैं वे धनभागी हैं और जो होने वाले हैं उनका भी आवाहन किया जाता है।

स्रोत- ( 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' साहित्य)


🕉🐚⚔🚩🌞🇮🇳⚔🌷🙏🏻

रविवार, 27 फ़रवरी 2022

महाशिवरात्रि के महा उपाय से बदलेगा भाग्य


 महाशिवरात्रि - भाग्य की रेखा बदलने हेतु ( युवा विशेष)


 *जिनकी उम्र 15 से 45 साल के अन्दर है..उनको अगर कोई बीमारी नहीं है...शुगर नहीं है... हो सके तो हिम्मत दिखाकर ... सुबह के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिए... भाग्य की रेखा न बदले तो मुझे कहना ...महा शिवरात्रि के सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक निर्जला उपवास | जो ज्यादा दुबले -पतले हो वे ये न करें | जो बराबर ठीकठाक हो वे जरुर करें ... बहुत फायदा होगा..युवान भाई-बहनों को तो मैं आग्रहपूर्वक कहूंगा कि महाशिवरात्रि के दिन निर्जला उपवास जरुर करें और रात को फिर सो मत जाओ ..रात को २-३-४ बजे तक जगकर जप करें | युवा भाई-बहनें खास हिम्‍मत करें और जप करो तो पूर्व और उत्तर के बीच ..ईशान कोण पड़ता है..उधर मुंह कर के जप करना |*

🙏🏻 *और एक माला महामृत्युंजय मंत्र की अपने गुरुदेव को दक्षिणा दो और प्राथना करें " हे भोला नाथ ! हमारे बापूजी हमें प्रीति देते है..ज्ञान देते है ..शक्ति देते है ..दीक्षा देते है ...ऐसे हमारे गुरुदेव का स्वास्थ्‍य बढ़िया रहे और हमारे गुरुदेव की आयु खूब -खूब लंबी हो " रात को १२ बजे ..१२:३० बजे ..१ बजे जब भी करना चाहो तब करना जरूर | ये पवित्र तिथि के दिन अपना भजन ..भक्ति बढ़ाने के दिन है | इसका जरुर फायदा उठाये |*

💥 *विशेष - 01 मार्च 2022 मंगलवार को महाशिवरात्रि है ।*

💥 ? *महाशिवरात्रि* 🌷

🙏🏻 *मंगलवार, 01 मार्च को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन की गई शिव पूजा से पिछले समय से चली आ रही परेशानियां खत्म हो सकती हैं और धन लाभ भी मिल सकता है। यहां जानिए शास्त्रों में बताए गए उपाए...*

👉🏻 *शिवरात्रि पर करें इन 8 में से कोई 1 उपाय, दूर हो सकती है परेशानी*

🔥 *महाशिवरात्रि पर रात में किसी शिव मंदिर में दीपक जलाएं । शिव पुराण के अनुसार कुबेर देव ने पूर्व जन्म में रात के समय शिवलिंग के पास रोशनी की थी इसी वजह से अगले जन्म में वे देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।*

🙏🏻 *महाशिवरात्रि पर छोटा सा पारद (पारा) शिवलिंग लेकर आएं और घर के मंदिर में इसे स्थापित करें। शिवरात्रि से शुरू करके रोज इसकी पूजा करें । इस उपाय से घर की दरिद्रता दुर होती है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।*

🙏🏻 *यदि आप चाहें तो शिवरात्रि पर स्फटिक के शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं। घर के मंदिर में जल, दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से इस शिवलिंग को स्नान कराएं । मंत्र - ॐ नम: शिवाय ।  मंत्र जप कम से कम 108 बार करें।*

🙏🏻 *हनुमानजी भगवान शिव के ही अंशावतार माने गए हैं। शिवरात्रि पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमानजी और शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इनकी कृपा से भक्त की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।*

👩🏻 *किसी सुहागिन को सुहाग का सामान उपहार में दें । जो लोग यह उपाय करते है, उनके वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं। सुहाग का सामान जैसे - लाल साड़ी, लाल चूडियां, कुम -कुम आदि।*

💰 *महाशिवरात्रि पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति को अनाज और धन का दान करें। शास्त्रों में बताया गया है कि गरिबों को दान करने से पुराने सभी पापों का असर खत्म हो सकता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।*

🍚 *जो लोग शिवरात्रि पर किसी बिल्व वृक्ष के नीचे खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। ऐसे लोग जीवनभर सुख-सुविधाएं प्राप्ति करते हैं और कार्यों में सफल होते हैं।*

🌳 *शिव पुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रुप है। इसलिए इसकी पूजा करें।फूल, कुम -कुम, प्रसाद आदि चीजें विशेष रुप से चढ़ाएं । इसकी पूजा से जल्दी शुभ फल मिलते हैं। शिवरात्रि पर बिल्व के पास दीपक जलाएं ।*

           

🌷 *महाशिवरात्रि* 🌷

🙏🏻 *भगवान शिव बहुत भोले हैं, यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि (1 मार्च, मंगलवार) पर शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय करते हैं।*

*कुछ ऐसे ही छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है। ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। हर समस्या के समाधान के लिए शिवपुराण में एक अलग उपाय बताया गया है। ये उपाय इस प्रकार हैं-*

👉🏻 *महाशिवरात्रि पर करें ये आसान उपाय, प्रसन्न होंगे भोलेनाथ*

🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-*

👨‍👩‍👧‍👦  *1. बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।*

😇  *2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।*

😃 *3. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।*

🙏🏻 *4. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।*

😩 *5. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।*

🚶🏻 *6. यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर हो सकती है।*

🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है-*

🌷 *1. लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।*

🌷 *2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।*

🌷 *3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।*

🌷 *4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।*

🌷 *5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।*

🌷 *6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।*

🌷 *7. कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।*

🌷 *8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।*

 🌷 *9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।*

🌷 *10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।*

🌷 *11. दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।*

💰 *आमदनी बढ़ाने के लिए*

*महाशिवरात्रि पर घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी पूजा करें। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जाप करें-*

*ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं*

*प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं। बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें। माना जाता है ऐसा करने से व्यक्ति की आमदनी में इजाफा होता है।*

👪 *संतान प्राप्ति के लिए उपाय*

*महाशिवरात्रि की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। अब प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से जलाभिषेक करें। इस प्रकार 11 बार जलाभिषेक करें। उस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।*

*यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।*

😩 *बीमारी ठीक करने के लिए उपाय*

*महाशिवरात्रि पर पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी अन्य धातु के बर्तन का उपयोग करें। अभिषेक करते समय ऊं जूं स: मंत्र का जप करते रहे।*


रविवार, 13 फ़रवरी 2022

वैलेंटाइन डे नहीं,मातृ–पितृ पूजन दिवस’ शुभ ज्योतिष की दृष्टि से

वैलेंटाइन डे नहीं,मातृ–पितृ पूजन दिवस’ शुभ ज्योतिष की दृष्टि से


       🙏🏻 *अपने माता पिता का आदर करते  और वेलेंटाईन डे का कचरा दिमाग में न रखें  .....कि ये लोग मानते हैं  तो हम भी मनाये... नहीं  !! अपने माता पिता का पूजन करें.... बापूजी ने सहज में ऐसी सुन्दर सीख दी ।  हर साल जो 14 फरवरी को वेलेंटाईन डे मनाते हैं न ....मूर्ख लोग.... पर*


       🙏🏻 *14 फरवरी के दिन अधिकांशतः सूर्य भगवान कुम्भ राशि पे होतें है । बिलकुल कोई पंडित इसको नकार नहीं सकता, लगभग अधिकांश 14 फरवरी को सूर्य भगवान कुम्भ राशि पे होतें हैं और कुम्भ राशि के स्वामी कौन हैं ? शनि देव । कुम्भ राशि के स्वामी शनि, शनि देव सूर्य भगवान के बेटे हैं । तो वो अपने पिता का खूब आदर करते और पिता की परिक्रमा करते हैं । तो जो 14 फरवरी के दिन वेलेंटाईन डे मनाते हैं  न उनपे सूर्य भगवान और शनि देव दोनों नाराज़ होतें है भयंकर और 14 फरवरी के दिन बापूजी के कहे अनुसार जो माता पिता का पूजन करते हैं उनपे सूर्य भगवान और शनि देव दोनों खुश होते हैं .... क्यो कि उस दिन शनि देवता भी सूर्य भगवान की पूजा करते हैं और सूर्य भगवान की परिक्रमा करते हैं ।*🙏🏻

शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

वैलेंटाइन डे नहीं मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाना चाहिए, वैज्ञानिकों ने क्या कहा?


 वैलेंटाइन डे नहीं मातृ-पितृ पूजन दिवस  मनाना चाहिए, वैज्ञानिकों ने कहा?


      *माता-पिता ने हमसे अधिक वर्ष दुनिया में गुजारे हैं, उनका अनुभव हमसे अधिक है और सद्गुरु ने जो महान अनुभव किया है उसकी तो हमारे छोटे अनुभव से तुलना ही नहीं हो सकती। इन तीनों के आदर से उनका अनुभव हमें सहज में ही मिलता है। अतः जो भी व्यक्ति अपनी उन्नति चाहता है, उस सज्जन को माता-पिता और सद्गुरु का आदर, पूजन, आज्ञापालन तो करना चाहिए, चाहिए और चाहिए ही!*


       14 फरवरी को ʹवेलेंटाइन डेʹ मनाकर युवक-युवतियाँ प्रेमी-प्रेमिका के संबंध में फँसते हैं। वासना के कारण उनका ओज-तेज दिन दहाड़े नीचे के केन्द्रों में आकर नष्ट होता है। उस दिन ʹमातृ-पितृ पूजनʹ काम-विकार की बुराई व दुश्चरित्रता की दलदल से ऊपर उठाकर उज्ज्वल भविष्य, सच्चरित्रता, सदाचारी जीवन की ओर ले जायेगा।


       *अनादिकाल से महापुरुषों ने अपने जीवन में माता-पिता और सद्गुरु का आदर-सम्मान किया है।*


       कोई हिन्दू, ईसाई, मुसलमान, यहूदी नहीं चाहते कि हमारे बच्चे विकारों में खोखले हो जायें, माता-पिता व समाज की अवज्ञा करके विकारी और स्वार्थी जीवन जीकर तुच्छ हो जायें और बुढ़ापे में कराहते रहें। बच्चे माता-पिता व गुरुजन का सम्मान करें तो उनके हृदय से विशेष मंगलकारी आशीर्वाद उभरेगा, जो देश के इन भावी कर्णधारों को ʹवेलेन्टाइन डेʹ जैसे विकारों से बचाकर गणेशजी की नाईं इंद्रिय-संयम व आत्मसामर्थ्य विकसित करने में मददरूप होगा।


       *माता, पिता एवं गुरुजनों का आदर करना हमारी संस्कृति की शोभा है। माता-पिता इतना आग्रह नहीं रखते कि संतानें उनका सम्मान-पूजन करें परंतु बुद्धिमान, शिष्ट संतानें माता-पिता का आदर पूजन करके उनके शुभ संकल्पमय आशीर्वाद से लाभ उठाती हैं।*


       14 विकसित और विकासशील देशों के बच्चों व युवाओं पर किये गये सर्वेक्षण में भारतीय बच्चे व युवक सबसे अधिक सुखी और स्नेही पाये गये। लंदन व न्यूयार्क में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका एक बड़ा कारण है- भारतीय लोगों का पारिवारिक स्नेह एवं निष्ठा! भारतीय युवाओं ने कहा, ʹउनकी जीवन में प्रसन्नता लाने तथा समस्याओं को सुलझाने में उनके माता-पिता का सर्वाधिक योगदान है।ʹ


       *भारत में माता-पिता हर प्रकार से अपने बच्चों का पोषण करते हैं और माता-पिताओं का पोषण संतजनों से होता है। माता-पिता, बच्चे-युवक सभी को पोषित करने वाला हिंदू संत आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित ʹमातृ-पितृ पूजन दिवसʹ इस निष्कर्ष की पुष्टि करता है।*


#आधुनिक वैज्ञानिकों का मत


       माता-पिता के पूजने से अच्छी पढाई का क्या संबंध- ऐसा सोचने वालों को अमेरिका की ʹयूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनियाʹ के सर्जन व क्लिनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सू किम और ʹचिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल ऑफ फिलाडेल्फिया, पेंसिल्वेनियाʹ के एटर्नी एवं इमिग्रेशन स्पेशलिस्ट जेन किम के शोधपत्र के निष्कर्ष पर ध्यान देना चाहिए।


       *अमेरिका में एशियन मूल के विद्यार्थी क्यों पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करते हैं? इस विषय पर शोध करते हुए उन्होंने यह पाया कि वे अपने बड़ों का आदर करते हैं और माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हैं तथा उज्ज्वल भविष्य-निर्माण के लिए गम्भीरता से श्रेष्ठ परिणाम पाने हेतु अध्ययन करते हैं।*


      भारतीय संस्कृति के शास्त्रों और संतों में श्रद्धा न रखने वालों को भी अब उनकी इस बात को स्वीकार करके पाश्चात्य विद्यार्थियों को सिखाना पड़ता है कि माता-पिता का आदर करने वाले विद्यार्थी पढ़ाई में श्रेष्ठ परिणाम पा सकते हैं।


       *जो विद्यार्थी माता-पिता का आदर करेंगे वे ʹवेलेन्टाइन डेʹ मनाकर अपना चरित्र भ्रष्ट नहीं कर सकते। संयम से उनके ब्रह्मचर्य की रक्षा होने से उनकी बुद्धिशक्ति विकसित होगी, जिससे उनकी पढ़ाई के परिणाम अच्छे आयेंगे। 


संदर्भ

आशारामजी बापू के प्रवचन से


शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022

जया एकादशी व्रत, महत्व और व्रत कथा



जया एकादशी व्रत, महत्व और व्रत कथा


*जया एकादशी व्रत का महत्व:-*

       इंद्रलोक की अप्सरा को श्राप के कारण पिशाच योनि में जन्म लेना पड़ा, उससे मुक्ति के लिए उसने जया एकादशी व्रत किया. भगवान विष्णु की कृपा से वह पिशाच योनि से मुक्त हो गई और फिर से उसे इंद्रलोक में स्थान प्राप्त हो गया. भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को जया एकादशी के पुण्य के बारे में बताया था.


*जया एकादशी व्रत कथा:-*


       *एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से माघ शुक्ल एकादशी व्रत की महत्ता के बारे में बताने को कहा. तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे जया एकादशी व्रत की कथा सुनाई:-*


      एक समय की बात है नंदन वन में उत्सव हो रहा था, जिसमें देवी-देवता, संत आदि उपस्थित थे. उत्सव में संगीत एवं नृत्य भी हो रहा था. गंधर्व माल्यवान एवं पुष्यवती भी नृत्य कर रहे थे. दोनों एक दूसरे पर मोहित हो गए और सभी की उपस्थिति में इस प्रकार से नृत्य करने लगे कि वे मार्यादाएं भूल गए.

      उनके इस व्यवहार से इंद्र देव कुपित हो गए और उन्होंने दोनों को स्वर्ग लोक से निष्कासित करके मृत्यु लोक यानी पृथ्वी पर निवास करने का श्राप दे दिया. श्राप के कारण पुष्यवती एवं माल्यवान को पिशाच योनि में जीवन प्राप्त हुआ.

       वे दोनों हिमालय पर एक वृक्ष पर अपना आश्रय लिए थे. उनकी जीवन बड़ा ही कष्टमय था. उस वर्ष माघ शुक्ल एकादशी को उन दोनों ने भोजन नहीं किया, फलाहार किया. सर्दी के कारण नींद नहीं आई, तो उन दोनों ने रात्रि जागरण किया. भयंकर सर्दी के कारण उन दोनों की मृत्यु हो गई.

      पुष्यवती एवं माल्यवान ने अनजाने में ही जया एकादशी व्रत कर लिया था. भगवान विष्णु की दृष्टि उन दोनों पर पड़ी, तो उन्होंने प्रेत योनि से दोनों को मुक्ति प्रदान कर दी. जया एकादशी व्रत के प्रभाव से दोनों पहले से भी अधिक रूपवान हो गए और फिर से स्वर्ग लोक पहुंच गए

      पुष्यवती एवं माल्यवान को देखकर इंद्रदेव हैरान रह गए. तब उन दोनों ने देवराज इंद्र से जया एकादशी व्रत के महत्व और भगवान विष्णु की महिमा के बारे में बताया. यह जानकर इंद्रदेव भी खुश हो गए और दोनों को फिर से स्वर्ग लोक में रहने के लिए अपनी अनुमति दे दिए.



*इस प्रकार से जो भी जया एकादशी व्रत रखता है, उसे नीच योनि से मुक्ति मिलती है और उसके दुखों का नाश होता है.*


गुरुवार, 10 फ़रवरी 2022

वेलेंटाइन डे के बाद लड़कियों में कैंसर व बांझपन


वेलेंटाइन डे के बाद लड़कियों में कैंसर व बांझपन


सावधान- वेलेंटाइन डे के बाद लाखों लड़कियों में कैंसर व बांझपन पाया गया!



         पश्चिमी देशों में 14 फरवरी को युवक-युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्ड्स, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं। यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं। इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है। इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को स्कूलों में केवल संयम अभियानों पर करोड़ों डालर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती। अब यह कुप्रथा हमारे भारत में भी पैर जमा रही है। हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे वेलेन्टाइन डे का बहिष्कार करना चाहिए। इन सभी से बचने के लिए हिंदू संत आसाराम बापू ने एक नयी पहल की है- 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मनाने की।


पिछले साल वेलेंटाइन डे से बर्बादी


           *Panchtatv.org पर लिखा है कि वेलेंटाइन डे के बाद मुश्किल से 10 दिन के अंदर गायनेकोलोजिस्टों के पास लड़कियों की भीड़ लग जाती है और टीवी पर ऐड आता है- सिर्फ एक कैप्सूल से 72 घंटों के अंदर अनचाही प्रेगनेंसी से छुटकारा और बिना दिमाग की लड़कियां ऐसी गोलियां, जिनका न कम्पोजिशन पता होता है न कॉन्सेप्ट, बस निगल लेती हैं।*


       इन फेक गोलियों में आर्सेनिक भरा होता है जो 72 घंटों के अंदर सिर्फ बनने वाले भ्रूण को खत्म नहीं करता, बल्कि पूरा का पूरा fertility system ही करप्ट कर देता है!


      *शुरू में तो गोलियां खाकर सती-सावित्री बन जाती हैं लेकिन शादी के बाद पता चलता है- वे अब माँ नहीं बन सकतीं।*


       पिछले साल के डाटा अनुसार 43 लाख लड़कियों में बांझपन और 30 लाख में कैंसर पाया गया।


       तो सबको पता चल जाता है इनका भूतकाल कैसा रहा है, पर कोई बोलता नहीं; जिन्दगी खुद अभिशाप बन जाती है।*


       सरकार हर साल मातृत्व-सुरक्षा, जननी सुरक्षा, 'बेटी बचाओ' जैसी योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक देती है।


       आज हालत ये है कि 13-14 साल की कुछ बच्चियांँ बैग में i-pill लेकर घूम रही हैं। ये ऐसी जहरीली चीज़ें valentine पर medical mafia भारतीय बाजारों में जानबूझकर उतारता है।*


       क्योंकि सबको पता है, भारत में बुद्धिजीवी वर्ग का कोई मान नहीं होता। पहले ये लड़कियों को जहर खिलाकर बीमारी देते हैं...फिर उसकी दवाई बेचकर अरबों रूपये कमाते हैं... जिसमें समाज नेता भी कमाई करते हैं... क्योंकि ऐसे जहर को बेचने का परमिट और उनकी चेकिंग न करवाने का काम नेता ही कर सकते हैं।


      *बेटी आपकी, तो उसकी जिम्मेदारी भी आपकी! इस valentine उसके पीछे और कोई ही नहीं बल्कि आप खुद सजग रहोगे, गलत देखने पर विरोध करोगे।*

      *समय है- वेलेंटाइन जैसे कुकर्म को बढ़ावा देने वाली घटिया मानसिकता का त्याग कर अपने माता पिता का पूजन कर देश की युवा पीढी को सुदृढ़ बनाने का।*

      *या फिर अगर चाहते हो- आपकी बेटियां जमके अय्याशी करें और बाद में कैंसर, बांझपन की वजह से मर जाएं और आपका बोझ हल्का हो...


       समस्या आपके बेटी की अय्याशी और उसके मरने से नहीं, समस्या होती है, जो दवाइयां बेचकर विदेशी कम्पनियां हर साल हमारे देश का अरबों रुपया लुट लेती हैं उससे है।



वेलेंटाइन डे नहीं मातृ-पितृ पूजन दिवस


      *इस वेलेंटाइन डे को रोकने के लिए 'संत आशाराम' बापू ने बताया कि तुम भारत के लाल और भारत की लालियाँ (बेटियाँ) हो। प्रेमदिवस मनाओ, अपने माता-पिता का सम्मान करो और माता-पिता बच्चों को स्नेह करें।*


       मेरे प्यारे युवक-युवतियों भाईयों- बहनो और उनके माता-पिता! आप भारतवासी हैं। दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों की संतान हैं। प्रेमदिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश होता है , ऐसे दिवस का त्याग करके माता-पिता आपकी संतानों का नाश होने से बचाएँ! संतानों को सत्कर्म करने में लगाएं ताकि उनका उद्धार हो सके वह पाश्चात्य संस्कारों से मुक्त होकर, अपने अच्छे बुरे का  ध्यान कर सके साथ ही जीवन  के सुंदर रसों का पान करें!


*मातृदेवो भव। पितृदेवो भव। बालिकादेवो भव। कन्यादेवो भव। पुत्रदेवो भव।*


*माता पिता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा।*🙏🏻


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सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

भीष्म अष्टमी का रहस्य और भीष्म पितामह का इच्छा मृत्यु वरदान

 8 फरवरी भीष्म अष्टमी 2022


भीष्म अष्टमी का रहस्य और भीष्म पितामह का इच्छा मृत्यु वरदान

भीष्म महाभारत कथा:-


 *_इस कथा के अनुसार भीष्म पितामह का असली नाम देवव्रत था। वे हस्तिनापुर के राजा शांतनु की पटरानी गंगा की कोख से उत्पन्न हुए थे। एक समय की बात है। राजा शांतनु शिकार खेलते-खेलते गंगा तट के पार चले गए। वहां से लौटते वक्त उनकी भेंट हरिदास केवट की पुत्री मत्स्यगंधा (सत्यवती) से हुई।_*


*_मत्स्यगंधा बहुत ही रूपवान थी। उसे देखकर शांतनु उसके लावण्य पर मोहित हो गए। एक दिन राजा शांतनु हरिदास के पास जाकर उनकी पुत्री सत्यवाती का हाथ मांगते है, परंतु वह राजा के प्रस्ताव को ठुकरा देता है और कहता है कि- महाराज! आपका ज्येष्ठ पुत्र देवव्रत है। जो आपके राज्य का उत्तराधिकारी है, यदि आप मेरी कन्या के पुत्र को राज्य का उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा करें तो मैं मत्स्यगंधा का हाथ आपके हाथ में देने को तैयार हूं। परंतु राजा शांतनु इस बात को मानने से इनकार कर देते है।_*

 

*_ऐसे ही कुछ समय बीत जाता है, लेकिन वे सत्यवती को भूला नहीं पाते हैं और दिन-रात उसकी याद में व्याकुल रहने ललते हैं। यह सब देख एक दिन देवव्रत ने अपने पिता से उनकी व्याकुलता का कारण पूछा। सारा वृतांत जानने पर देवव्रत स्वयं केवट हरिदास के पास गए और उनकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए गंगा जल हाथ में लेकर शपथ ली कि 'मैं आजीवन अविवाहित ही रहूंगा'।_*

 

*_देवव्रत की इसी कठिन प्रतिज्ञा के कारण उनका नाम भीष्म पितामह पड़ा। तब राजा शांतनु ने प्रसन्न होकर अपने पुत्र को इच्छित मृत्यु का वरदान दिया। महाभारत के युद्ध की समाप्ति पर जब सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण हुए तब भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्याग दिया। इसीलिए माघ शुक्ल अष्टमी को उनका निर्वाण दिवस मनाया जाता है।_*


*_मान्यतानुसार इसी दिन व्रत रखकर जो व्यक्ति अपने पित्तरों के निमित्त जल, कुश और तिल के साथ श्रद्धापूर्वक तर्पण करता है, उसे संतान तथा मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती है तथा उनके पितरों को भी वैकुंठ प्राप्त होता है। इस दिन भीष्म पितामह की स्मृति में श्राद्ध भी किया जाता है।_*


          

बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

उत्तम चरित्र

                     

                                              उत्तम चरित्र


 उत्तम चरित्र व्यक्ति की सबसे बड़ी संपदा है। चरित्र से ही व्यक्तित्व आकार पाता है। चरित्र मन को उज्ज्वल करता है। जीवन को संवारता है। चरित्र के प्रभाव से ही लोग मित्र बनते हैं और सुख संपत्ति के मार्ग खुलते हैं। संसार में मनुष्य के पास यदि सभी साधन हैं, परंतु आदर्श चरित्र नहीं है तो सब व्यर्थ।


 एक बौद्ध कहावत है कि-विचार से कर्म की उत्पत्ति होती है, कर्म से आदत की उत्पत्ति होती है, आदत से चरित्र की उत्पत्ति होती है और चरित्र से आपके प्रारब्ध/कर्म फल की उत्पत्ति होती है।व्यक्ति को योग्यता की वजह से सफलता मिलती है और चरित्र से ही उस सफलता का संरक्षण संभव है। जो सफल व्यक्ति अपने चरित्र को नहीं निखारते उनकी सफलता स्थायी नहीं रहती। 


                 रावण और कंस आदि पराक्रमियों के पास अपार शक्ति थी, परंतु उनका चरित्र आदर्श नहीं था। इसी कारण समाज उनका तिरस्कार करता है। वस्तुत: धन बल और बाहुबल से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है चरित्रवान बनना। इसलिए जीवन में चरित्र को सुधारना ही मनुष्य का परम लक्ष्य होना चाहिए। हम चाहे किसी भी क्षेत्र में सक्रिय हों, हमें चरित्र को बनाकर और बचाकर रखना चाहिए।

               निष्कलंक चरित्र निर्माण के लिए नम्रता, अहिंसा, क्षमाशीलता, गुरुसेवा, शुचिता, आत्मसंयम, विषयों के प्रति अनासक्ति, निर्भयता, दानशीलता, स्वाध्याय, तपस्या और त्याग-परायणता जैसे गुण विकसित करने चाहिए।

               ज्ञान के बिना चरित्र का निर्माण नहीं हो सकता। इसलिए शिक्षा के साथ-साथ युवा शक्ति का चरित्र निर्माण आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। चरित्र के निर्माण में परिवार की अहम भूमिका होती है। माता-पिता जैसा करते हैं, वैसा ही बच्चे सीखते हैं।चरित्र को अधिक प्रभावित करने में परिवार के बाद विद्यालय का परिवेश, सामाजिक रहन-सहन, व्यवहार व वातावरण भी विशिष्ट स्थान रखते हैं। ऐसे में कह सकते हैं एक कच्चे घड़े की तरह युवा पौधों को संस्कारित करना पूरे समाज का दायित्व है।


                                                                                                           देवेन्द्र कुमार शर्मा

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

चंदन को कोयले में मत बदलो, मित्रों !

 चंदन को कोयले में मत बदलो, मित्रों !


सुनसान जंगल में एक लकड़हारे से पानी का लोटा पीकर प्रसन्न हुआ राजा कहने लगा - हे पानी पिलाने वाले ! किसी दिन मेरी राजधानी में अवश्य आना, मैं तुम्हें पुरुस्कार दूँगा, लकड़हारे ने कहा - बहुत अच्छा।


इस घटना को घटे पर्याप्त समय व्यतीत हो गया, अन्ततः लकड़हारा एक दिन चलता-फिरता राजधानी में जा पहुँचा और राजा के पास जाकर कहने लगा - मैं वही लकड़हारा हूँ, जिसने आपको पानी पिलाया था।


राजा ने उसे देखा और अत्यन्त प्रसन्नता से अपने पास बिठाकर सोचने लगा कि - इस निर्धन का दुःख कैसे दूर करुँ ? अन्ततः उसने सोच-विचार के पश्चात् चन्दन का एक विशाल उद्यान (बाग) उसको सौंप दिया,लकड़हारा भी मन में प्रसन्न हो गया। चलो अच्छा हुआ। इस बाग के वृक्षों के कोयले खूब होंगे, जीवन कट जाएगा।


यह सोचकर लकड़हारा प्रतिदिन चन्दन काट-काटकर कोयले बनाने लगा और उन्हें बेचकर अपना पेट पालने लगा, थोड़े समय में ही चन्दन का सुन्दर बगीचा एक वीरान बन गया, जिसमें स्थान-स्थान पर कोयले के ढेर लगे थे। इसमें अब केवल कुछ ही वृक्ष रह गये थे, जो लकड़हारे के लिए छाया का काम देते थे।


राजा को एक दिन यूँ ही विचार आया कि, चलो, तनिक लकड़हारे का हाल देख आयें, चन्दन के उद्यान का भ्रमण भी हो जाएगा, यह सोचकर राजा चन्दन के उद्यान की और जा निकला। उसने दूर से उद्यान से धुआँ उठते देखा। निकट आने पर ज्ञात हुआ कि चन्दन जल रहा है और लकड़हारा पास खड़ा है, दूर से राजा को आते देखकर लकड़हारा उसके स्वागत के लिए आगे बढ़ा, राजा ने आते ही कहा - भाई! यह तूने क्या किया ?


लकड़हारा बोला - आपकी कृपा से इतना समय आराम से कट गया, आपने यह उद्यान देकर मेरा बड़ा कल्याण किया, कोयला बना-बनाकर बेचता रहा हूँ। अब तो कुछ ही वृक्ष रह गये हैं। यदि कोई और उद्यान मिल जाए तो, शेष जीवन भी व्यतीत हो जाए।


 राजा मुस्कुराया और कहा - अच्छा, मैं यहीं खड़ा हुआ हूँ, तुम कोयला नहीं, प्रत्युत इस लकड़ी को ले-जाकर बाजार में बेच आओ, लकड़हारे ने दो गज (लगभग पौने दो मीटर) की लकड़ी उठाई और बाजार में ले गया, लोग चन्दन देखकर दौड़े और अन्ततः उसे तीन सौ रुपये मिल गये, जो कोयले से कई गुना ज्यादा थे, लकड़हारा मूल्य लेकर रोता हुआ राजा के पास आया और जोर-जोर से रोता हुआ, अपनी भाग्यहीनता स्वीकार करने लगा, हाय अनजाने में, मैंने ये क्या कर डाला ?


इस कथा में चन्दन का बाग मनुष्य का शरीर और हमारा एक-एक श्वास चन्दन का वृक्ष है, पर अज्ञानता वश हम इन चन्दन को कोयले में परिवर्तित कर रहे हैं।


राग, द्वेष और मोह की अग्नि में, हम इस जीवन रूपी चन्दन को जला रहे हैं।


जब अंत में श्वास रूपी चन्दन के पेड़ कम रह जायेंगे, तब अहसास होगा कि, व्यर्थ ही अनमोल चन्दन को, इन तुच्छ कारणों से हम दो कौड़ी के कोयले में बदल रहे थे।


अभी भी देर नहीं हुई है, हमारे पास जो भी श्वास रूपी चंदन के पेड़ शेष हैं, उसी के द्वारा अभी भी जीवन सँवारा जा सकता है।