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सोमवार, 3 मई 2021

सुविचार, विद्वानों के सुविचार(कोटस)

 सुविचार


1) कर्म वो आईना है, जो हमारा स्वरूप हमें दिखा देता है | अत: हमें कर्म का एहसानमंद होना चाहिए |   – विनोबा भावे


2)  बुराई से असहयोग करना मानव का पवित्र कर्तव्य है | – महात्मा गांधी


3) कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता |   – डिजरायली


4) दुःख पर तरस खाना मानवीय है; दुःख दूर करना देवतातुल्य है |   – होरेस मैन


5) पीड़ा पाप का परिणाम है |महात्मा गौतम बुद्ध


6) विपत्ति हीरे की धुल है, जिससे परामात्मा अपने रत्नों को चमकाता है |  – लेटन


7) क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है |  – इंगरसोल


8) जब क्रोध में हों, तो दस बार सोचकर बोलिए, जब ज्यादा क्रोधित अवस्था में हों, तो हजार बार सोचिए |    – जेफरसन


9) जो मनुष्य अपने क्रोध को अपने ही ऊपर झेल लेता है, वह दूसरों के क्रोध से बच जाता है | – सुकरात


10) किसी के प्रति मन में क्रोध लिये रहने की अपेक्षा उसे तुरंत प्रकट कर देना अधिक अच्छा है, जैसे क्षणभर में जल जाना देर तक सुलगने से अधिक अच्छा है |  – वेदव्यास

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