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बुधवार, 30 जून 2021

उच्चारण के स्थान पर व्यंजनो के प्रकार

 

उच्चारण के स्थान पर व्यंजनो के प्रकार

*आज के छात्रों को भी नहीं पता होगा कि भारतीय भाषाओं की #वर्णमाला विज्ञान से भरी है। वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है और सटीक गणना के साथ क्रमिक रूप से रखा गया है। इस तरह का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अन्य #विदेशी भाषाओं की वर्णमाला में शामिल नहीं है। जैसे देखे*


 *क ख ग घ ड़* - पांच के इस समूह को "#कण्ठव्य" *कंठवय* कहा जाता है क्योंकि इस का उच्चारण करते समय कंठ से ध्वनि निकलती है। उच्चारण का प्रयास करें।


 *च छ ज झ ञ* - इन पाँचों को "तालव्य" *#तालु* कहा जाता है क्योंकि इसका उच्चारण करते समय जीभ तालू महसूस करेगी। उच्चारण का प्रयास करें।


 *ट ठ ड ढ ण*  - इन पांचों को "मूर्धन्य" *मुर्धन्य* कहा जाता है क्योंकि इसका उच्चारण करते समय जीभ #मुर्धन्य (ऊपर उठी हुई) महसूस करेगी। उच्चारण का प्रयास करें।


 *त थ द ध न* - पांच के इस समूह को *#दन्तवय* कहा जाता है क्योंकि यह उच्चारण करते समय जीभ दांतों को छूती है। उच्चारण का प्रयास करें।


 *प फ ब भ म* - पांच के इस समूह को कहा जाता है *#ओष्ठव्य* क्योंकि दोनों होठ इस उच्चारण के लिए मिलते हैं। उच्चारण का प्रयास करें।


 दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में ऐसा #वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं है! निःसंदेह, हमें अपनी ऐसी भारतीय भाषा पर गर्व होना चहिए.

गंगोत्री धाम कथा एवं महत्व

  गंगोत्री धाम की कथा

 श्रद्धालु यहां गंगा स्नान करके मां के दर्शन और पव‌ित्र भाव से केदारनाथ को अर्प‌ित करने ल‌िए जल लेते हैं।  गंगोत्री समुद्र तल से ९,९८० (३,१४० मी.) फीट की ऊंचाई पर स्थित है। गंगोत् से ही भागीरथी नदी निकलती है। गंगोत्री भारत के पवित्र और आध्‍यात्मिक रूप से महत्‍वपूर्ण नदी गंगा का उद्गगम स्‍थल भी है। 


गंगोत्री में गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भागीरथ के नाम पर इस नदी का नाम भागीरथी रखा गया। कथाओं में यह भी कहा गया है कि राजा भागीरथ ने ही तपस्‍या करके गंगा को पृथ्‍वी पर लाए थे। गंगा नदी गोमुख से निकलती है।


पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि सूर्यवंशी राजा सागर ने अश्‍वमेध यज्ञ कराने का फैसला किया। इसमें इनका घोड़ा जहां-जहां गया उनके ६०,००० बेटों ने उन जगहों को अपने आधिपत्‍य में लेता गया। इससे देवताओं के राजा इंद्र चिंतित हो गए।


 ऐसे में उन्‍होंने इस घोड़े को पकड़कर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। राजा सागर के बेटों ने मुनिवर का अनादर करते हुए घोड़े को छुड़ा ले गए। इससे कपिल मुनि को काफी दुख पहुंचा। उन्‍होंने राजा सागर के सभी बेटों को शाप दे दिया जिससे वे राख में तब्‍दील हो गए।


 राजा सागर के क्षमा याचना करने पर कपिल मुनि द्रवित हो गए और उन्‍होंने राजा सागर को कहा कि अगर स्‍वर्ग में प्रवाहित होने वाली नदी पृथ्‍वी पर आ जाए और उसके पावन जल का स्‍पर्श इस राख से हो जाए तो उनका पुत्र जीवित हो जाएगा। लेकिन राजा सागर गंगा को जमीन पर लाने में असफल रहे। बाद में राजा सागर के पुत्र भागीरथ ने गंगा को स्‍वर्ग से पृथ्‍वी पर लाने में सफलता प्राप्‍त की। 


गंगा के तेज प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए भागीरथ ने भगवान शिव से निवेदन किया। फलत: भगवान शिव ने गंगा को अपने जटा में लेकर उसके प्रवाह को नियंत्रित किया। इसके उपरांत गंगा जल के स्‍पर्श से राजा सागर के पुत्र जीवित हुए।


ऐसा माना जाता है कि १८वीं शताबादि में गोरखा कैप्‍टन अमर सिंह थापा ने आदि शंकराचार्य के सम्‍मान में गंगोत्री मंदिर का निर्माण किया था। यह मंदिर भागीरथी नदी के बाएं किनारे पर स्थित सफेद पत्‍थरों से निर्मित है। इसकी ऊंचाई लगभग २० फीट है। मंदिर बनने के बाद राजा माधोसिंह ने १९३५ में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया।


 फलस्‍वरूप मंदिर की बनावट में राजस्‍थानी शैली की झलक मिल जाती है। मंदिर के समीप 'भागीरथ शिला' है जिसपर बैठकर उन्‍होंने गंगा को पृथ्‍वी पर लाने के लिए कठोर तपस्‍या की थी। इस मंदिर में देवी गंगा के अलावा यमुना, भगवान शिव, देवी सरस्‍वती, अन्‍नपुर्णा और महादुर्गा की भी पूजा की जाती है।


हिंदू धर्म में गंगोत्री को मोक्षप्रदायनी माना गया है। यही वजह है कि हिंदू धर्म के लोग चंद्र पंचांग के अनुसार अपने पुर्वजों का श्राद्ध और पिण्‍ड दान करते हैं। मंदिर में प्रार्थना और पूजा आदि करने के बाद श्रद्धालु भगीरथी नदी के किनारे बने घाटों पर स्‍नान आदि के लिए जाते हैं।


 तीर्थयात्री भागीरथी नदी के पवित्र जल को अपने साथ घर ले जाते हैं। इस जल को पवित्र माना जाता है तथा शुभ कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। गंगोत्री से लिया गया गंगा जल केदारनाथ और रामेश्‍वरम के मंदिरों में भी अर्पित की जाती है।


मंदिर का समय: सुबह 6.15 से 2 बजे दोपहर तक और अपराह्न 3 से 9.30 तक (गर्मियों में)। सुबह 6.45 से 2 बजे दोपहर तक और अपराह्न 3 से 7 बजे तक (सर्दियों में)।


मंदिर अक्षय तृतीया (मई) को खुलती है और यामा द्वितीया को बंद होती है। मंदिर की गतिविधि तड़के चार बजे से शुरू हो जाती है। सबसे पहले 'उठन' (जागना) और 'श्रृंगार' की विधि होती है जो आम लोगों के लिए खुला नहीं होता है। 


सुबह 6 बजे की मंगल आरती भी बंद दरवाजे में की जाती है। 9 बजे मंदिर के पट को 'राजभोग' के लिए 10 मिनट तक बंद रखा जाता है। सायं 6.30 बजे श्रृंगार हेतु पट को 10 मिनट के लिए एक बार फिर बंद कर दिया जाता है। इसके उपरांत शाम 8 बजे राजभोग के लिए मंदिर के द्वार को 5 मिनट तक बंद रखा जाता है।


 ऐसे तो संध्‍या आरती शाम को 7.45 बजे होती है लेकिन सर्दियों में 7 बजे ही आरती करा दी जाती है। तीर्थयात्रियों के लिए राजभोग, जो मीठे चावल से बना होता है, उपलब्‍ध रहता है (उपयुक्‍त शुल्‍क अदा करने के बाद)।


तीर्थयात्री प्राय: गनगनानी के रास्‍ते गंगोत्री जाते हैं। यह वही मार्ग है जिसपर पराशर मुनि का आश्रम था जहां वे गर्म पानी के सोते में स्‍नान करते थे। गंगा के पृथ्‍वी आगमन पर (गंगा सप्‍तमी) वैसाख (अप्रैल) में विशेष श्रृंगार का आयोजन किया जाता है। 


पौराणिक कथाओं के अनुसार जिस दिन भगवान शिव ने भागिरथी नदी को भागीरथ को प्र‍स्‍तुत किया था उस दिन को (ज्‍येष्‍ठ, मई) गंगा दशहरा पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा जन्‍माष्‍टमि, विजयादशमी और दिपावली को भी गंगोत्री में विशेष रूप से मनाया जाता है।

मंगलवार, 29 जून 2021

राष्ट्रवाद क्या है

 * राष्ट्रवाद क्या है ??*

🔥 _जननी-जन्म भूमिश्च, स्वर्गादपि गरीयसी यही भाव राष्ट्रवाद है।_ 

🔥 __भारत भूमि  के ऋषि-मुनियों और महान पुरुषों का सम्मान ही हिंदुत्व और राष्ट्रवाद है।_ 

🔥 _यही धरती हमारी मां है, और धरती में रहने वाले मनुष्य हमारे भाई बांधव यही भाव हिंदुत्व है।_

🔥 _राष्ट्र के भूगोल, पशु, नदियों और वृक्षों का संरक्षण ही राष्ट्रवाद है।_

🔥 _राष्ट्रवाद हमें अनेकता में एकता यह भाव प्रदान करता है।_

🔥 _हमें हमारे राष्ट्र में राष्ट्र के कल्याण और विकास के लिए बोलनें की अभिव्यक्ति हो रही तो राष्ट्रवाद है।_

🔥 _भारत की भूमि में जन्में प्रत्येक मनुष्य का जन्म सिद्ध अधिकार ही राष्ट्रवाद है।_

🔥 _भारत का अन्न खाने वाला प्रत्येक व्यक्ति मां भारती की वंदना करें यही राष्ट्रवाद है, क्यूं जन्म भी यहीं लिया और मरना भी यहीं हैं।_

🔥 _राष्ट्र के सभी लोगों का कल्याण का भाव रखकर उस की दिशा में कार्य करना ही राष्ट्रवाद है और राष्ट्रवादी होना भी चाहिए।_

🔥 _राष्ट्र की संस्कृति और धरोहर संरक्षित हो यह भावना और इस भावना के लिए किया गया प्रयास ही राष्ट्र वाद है।_

🔥 _मेरे राष्ट्र के नागरिक प्रसन्न हो मेरे राष्ट्र के जीव सुखी हों यह सुखमय भावना ही राष्ट्रवाद है।_

🔥 _राष्ट्र के प्रति अन्तर्मन से निकले करुणा के भाव ही राष्ट्र वाद हैं।_

🔥 _वंदेमातरम् अर्थात हे जन्म देने वाली जन्म भूमि मैं तेरी वंदना करता हूं यह आत्मिक भाव ही राष्ट्र वाद है।_

🔥 _राष्ट्र के संत और राष्ट्र का कल्याण चाहने वाले अभय और निर्भय रहें यही राष्ट्रवाद है, और राष्ट्र को तोडने वाली शक्तियों की बुद्धि का सर्वनाश हो यह भाव त्वं और विचार ही राष्ट्र वाद है।_

🔥 _जाति और सम्प्रदाय से ऊपर उठकर जो कुछ भी राष्ट के लिए आपके मन में विचार हैं, उनका अनुसरण ही राष्ट्र वाद हैं।_ 

🔥 _एक परिपक्व राष्ट्र का निर्माण जिसमें गौ-नारी, कन्या गुरु और ज्ञानियों का सम्मान हो एसे वातावरण को जन्म देनें के लिए किया गया प्रयास ही राष्ट्र वाद है।_ 

🔥 _राष्ट्रवाद राष्ट्र के लिए कुछ श्रेष्ठ करनें का प्रयास है।_ 

🔥 _भारत भूमि में जन्में जन-जन के मन में राष्ट्रवाद का बीज बोना ही राष्ट्रवाद है।_ 

🔥 _हम सभी राष्ट्रवादी राष्ट्र के लिए मिलकर और मिलकर राष्ट्र का कल्याण करें यही जन जागृति ही राष्ट्रवाद है।_ 

 

                         

महाभारत सार

 **यदि "महाभारत" को पढ़ने का समय न हो तो भी इसके नौ सार- सूत्र हमारे जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सकते है :-*


*1. संतानों की गलत माँग और हठ पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो अंत में आप असहाय हो जायेंगे-*  *कौरवों को देख ले*


*2. आप भले ही कितने बलवान हो लेकिन अधर्म के साथ हो तो, आपकी विद्या, अस्त्र-शस्त्र शक्ति और वरदान सब निष्फल हो जायेगा -*    *कर्ण को देख ले*


*3. संतानों को इतना महत्वाकांक्षी मत बना दो कि विद्या का दुरुपयोग कर स्वयंनाश कर सर्वनाश को आमंत्रित करे-*  *अश्वत्थामा को देख ले*


*4. कभी किसी को ऐसा वचन मत दो  कि आपको अधर्मियों के आगे समर्पण करना पड़े -*  *भीष्म पितामह को देख ले*


*5. संपत्ति, शक्ति व सत्ता का दुरुपयोग और दुराचारियों का साथ अंत में स्वयंनाश का दर्शन कराता है -*   *दुर्योधन को देख ले*


*6. मुद्रा, मदिरा, अज्ञान, मोह, काम और अंधव्यक्ति के हाथ में सत्ता भी विनाश की ओर ले जाती है -*  *धृतराष्ट्र को देख ले*


*7. यदि व्यक्ति के पास विद्या, विवेक से बँधी हो तो विजय अवश्य मिलती है -* *अर्जुन को ही देख ले*


*8. हर कार्य में छल, कपट, व प्रपंच रच कर आप हमेशा सफल नहीं हो सकते -* *शकुनि को देख ले*


*9. यदि आप नीति, धर्म, व कर्म का सफलता पूर्वक पालन करेंगे, तो विश्व की कोई भी शक्ति आपको पराजित नहीं कर सकती -*   *युधिष्ठिर को देख ले*

रविवार, 27 जून 2021

गैर संवैधानिक निकायों की सूची


 गैर संवैधानिक निकायों की सूची


गैर-संवैधानिक या अतिरिक्त-संवैधानिक निकाय एक संसदीय कानून पारित होने के बाद स्थापित किए गए निकाय हैं। तात्पर्य यह है कि हमारे संविधान में इन संस्थानों का उल्लेख नहीं है।


➤योजना आयोग


1. इस आयोग को के.सी. नियोगी की अध्यक्षता में 1946 में गठित योजना सलाहकार बोर्ड की संस्तुति पर भारत सरकार (अर्थात् केंद्रीय मंत्रिमंडल) के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा मार्च, 1950 में स्थापित किया गया है, इस प्रकार, योजना आयोग न तो एक वैधानिक संस्थान और न ही एक संवैधानिक संस्थान हैI अन्य शब्दों में, यह एक गैर-संवैधानिक या अतिरिक्त-संवैधानिक निकाय (अर्थात् संविधान द्वारा निर्मित नहीं) और एक गैर-वैधानिक निकाय (अर्थात् संसद के एक अधिनियम द्वारा निर्मित नहीं) हैI भारत में, यह सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजना का सर्वोच्च अंग हैI अब, 1 जनवरी, 2015 से इसे एक अन्य निकाय नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया हैI


2. भारत का प्रधानमंत्री आयोग का पदेन अध्‍यक्ष होता हैI वह आयोग की बैठकों की अध्यक्ष्यता करते हैंI


3. आयोग का एक उपाध्यक्ष होता हैI वह आयोग का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (अर्थात् पूर्ण कालिक कार्यकारी प्रमुख) होता हैI वह केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समकक्ष पंचवर्षीय मसौदे के सूत्रीकरण और उसे प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होता हैI इसे केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निर्धारित समय के लिए नियुक्त किया जाता है और उसका रैंक कैबिनेट मंत्री के समान होता हैI यद्दपि वह कैबिनेट का सदस्य नहीं है, फिर भी उसे कैबिनेट की सभी बैठकों में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया जाता है (वोटिंग के अधिकार के बिना)


➤नीति (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) आयोग




1. यह योजना आयोग (जो शीर्ष-डाउन मॉडल पर आधारित था) को बदलने के लिए सरकार द्वारा 2015 में स्थापित किया गया है।


2. यह डाउन-अप मॉडल पर आधारित है।


3. यह संपूर्ण भारत के लिए नीति बनाने वाली संस्था है


4. आयोग के अध्यक्ष प्रधान मंत्री हैं।


5. वर्तमान उपाध्यक्ष राजीव कुमार हैं।


6. संचालन परिषद के स्थायी सदस्य-

(ए) सभी राज्य के मुख्यमंत्री

(बी) दिल्ली और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री

(सी) अंडमान और निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर

(डी) प्रधान मंत्री द्वारा नामित उपाध्यक्ष


➤राष्ट्रीय विकास परिषद


1. राष्ट्रीय विकास परिषद (एन.डी.सी) को पहली पंचवर्षीय योजना (मसौदा रूपरेखा) की संस्तुति पर भारत सरकार के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा अगस्त, 1952 में स्‍थापित किया गया थाI योजना आयोग की तरह, यह न तो एक संवैधानिक निकाय है और न ही एक वैधानिक निकायI


2. एनडीसी में निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैंI

A. भारत के प्रधानमंत्री (जो इसके अध्‍यक्ष/प्रमुख होते हैं)I

B. केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल के सभी मंत्री (1967 से)I

C. सभी राज्यों के मुख्य मंत्रीI

D. सभी संघ शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री/ प्रशासकI

E. योजना आयोग के सदस्यI


➤राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग


1. एन.एच.आर.सी एक वैधानिक (संवैधानिक नहीं) निकाय हैI इसे संसद द्वारा अधिनियमित एक अधिनियम अर्थात् मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 1993 में स्‍थापित किया गया था। इस अधिनियम को 2006 में संशोधित किया गया थाI


2. यह आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक अध्‍यक्ष और चार सदस्य शामिल होते हैंI अध्‍यक्ष भारत का सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश होना चाहिएI


3. अध्‍यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा छह सदस्यीय समिति जिसमें प्रधानमंत्री इसके प्रमुख, लोक सभा के सभापति, राज्य सभा के उपाध्‍यक्ष, संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों के नेता और केन्द्रीय गृह मंत्री शामिल होते हैं, की संस्तुति पर की जाती हैI इसके आलावा, भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ विचार-विमर्श करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश को भी नियुक्त किया जा सकता हैI


4. अध्‍यक्ष और सदस्‍य 5 वर्ष की अवधि के लिए या 70 वर्ष की आयु पूरी होने, जो भी पहले लागू होता हो, तक पद पर रह सकते हैंI वे इसके बाद केंद्र या राज्य सरकार के तहत किसी भी रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैंI


➤केन्द्रीय सूचना आयोग (सी.आई.सी)


1. सी.आई.सी को 2005 में केंद्र सरकार द्वारा स्‍थापित किया गया थाI इसे सूचना का अधिकार (2005) के प्रावधानों के तहत आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के माध्‍यम से गठित किया गया थाI अतः, यह एक संवैधानिक निकाय नहीं हैI


2. आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और 10 से अधिक सूचना आयुक्त शामिल नहीं होते हैंI


3. उनकी नियुक्‍त एक समिति जिसमें प्रधानमंत्री, अध्‍यक्ष के तौर पर और लोक सभा में विपक्षी दलों के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल का मंत्री शामिल होता है, की संस्तुति पर राष्‍ट्रपति द्वारा की जाती हैI


4. वे सामाजिक सेवा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, मास मीडिया, प्रबंधन, पत्रकारिता, कानून या प्रशासनिक और शासन में व्‍यापक ज्ञान और अनुभाव के साथ सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्‍यक्ति होने चाहिए।


5. वे किसी भी राज्य या संघ शासित प्रदेश के सांसद या विधायक नहीं होने चाहिएI वे किसी भी अन्य लाभ के पद पर या किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हुए या किसी भी प्रकार का व्यावसाय या किसी पेशे से जुड़े हुए नहीं होने चाहिएI


6. उनके पद का कार्यकाल 5 वर्ष की अवधि/ या सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष पूर्ण होने तक होता है जो भी पहले लागू होता होI वे पुनः नियुक्ति‍ के लिए पात्र नहीं होते हैंI


7. उन्‍हें एन.एच.आर.सी के मामले में उल्लिखित स्थितियों के अनुसार केवल राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता हैI


➤केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी)


1. CVC (सी.वी.सी) केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मुख्य एजेंसी हैI इसे केंद्र सरकार के एक कार्यकारी प्रस्‍ताव द्वारा 1964 में स्‍थापित किया गया था। इसकी स्थापना भ्रष्टाचार निरोध पर संथानम समिति (1962–64) की संस्‍तुति पर की गई थीI


2. इस प्रकार, वास्ताव में CVC न तो एक संवैधानिक निकाय था और ना ही एक वैधानिक निकायI सितम्बर, 2003 में, संसद द्वारा अधिनियमित एक कानून के तहत सी.वी.सी को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गयाI


3. CVC (सी.वी.सी) एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्‍यक्ष) और दो से अधिक सतर्कता आयुक्त शामिल नहीं होते हैंI


4. इनकी नियुक्ति तीन सदस्यीय समिति जिसमें प्रधानमंत्री प्रमुख के तौर पर और गृह मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री और लोक सभा में विपक्षी दलों के नेता शामिल होते हैं, की संस्तुति पर राष्‍ट्रपति द्वारा हस्‍ताक्षर तथा मोहर सहित जारी अधिपत्र द्वारा की जाती हैI


5. उनका कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक होता है जो भी पहले लागू होता होI उनके कार्यकाल के बाद, वे केंद्र सरकार या राज्य सरकार के तहत किसी भी रोजगार के लिए पात्र नहीं होते हैंI


 


 

भारत में पायलट्स के लिए ट्रेनिंग कोर्सेज और करियर स्कोप

 भारत में पायलट्स के लिए ट्रेनिंग कोर्सेज और करियर स्कोप



पायलट्स देश-दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री की बैकबोन होते हैं. ये प्रोफेशनल्स एयरोप्लेन/ एयरक्राफ्ट के संचालन और इंटरनल सिस्टम्स के प्रबंधन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं. ये पायलट्स आमतौर पर यात्रियों और सामानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए उड़ान भरते हैं. इसी तरह, पायलट्स कॉकपिट के प्रबंधन की जांच करने, एयर रेगुलेशन पर गहरी नज़र रखने, उड़ानों की योजना बनाने और आवश्यकता पड़ने पर हवाई यातायात की जांच करने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं.


अगर आप भारत में एक पायलट के तौर पर अपना करियर शुरू करना चाहते हैं, तो इसके बारे में सारी जरुरी जानकारी हासिल करने के लिए इस आर्टिकल को बड़े गौर से पढ़ें.



भारत में पायलट्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

हमारे देश में पायलट बनने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया निम्नलिखित है:


•    आपने अपनी 12वीं क्लास या समान परीक्षा कम से कम 50 फीसदी मार्क्स के साथ पास की हो.

•    आपने अपनी 12वीं क्लास में साइंस स्ट्रीम में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय जरुर पढ़े हों. 

•    आपकी न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए. 


भारत में पायलट्स के लिए ट्रेनिंग कोर्सेज

अगर आप ट्रेनिंग कोर्सेज करने के बाद, केवल एक को-पायलट के तौर पर उड़ान भर सकते हैं लेकिन, अगर आप भारत में एक कैप्टेन के तौर पर हवाई जहाज उड़ाना चाहते हैं तो आपको एयर लाइन ट्रांसपोर्ट पायलट’स लाइसेंस लेना होगा. भारत में पायलट्स के लिए ट्रेनिंग कोर्सेज निम्नलिखित हैं:



स्टूडेंट पायलट लाइसेंस: इस कोर्स की अवधि 06 माह की है.

प्राइवेट पायलट लाइसेंस: यह 01 वर्ष की अवधि का कोर्स है.

कमर्शियल पायलट लाइसेंस: यह 03 वर्ष की अवधि का कोर्स है.

भारत में प्रमुख ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स

अगर आप हमारे देश में कोई सूटेबल पायलट ट्रेनिंग कोर्स ज्वाइन करना चाहते हैं तो निम्नलिखित प्रमुख इंस्टीट्यूट्स में अप्लाई कर सकते हैं:


इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी, राय बरेली

राजीव गांधी नेशनल फ्लाइट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट

इंस्टीट्यूट ऑफ़ एविएशन एंड एविएशन सेफ्टी

गवर्नमेंट एविएशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, भुबनेश्वर

गवर्नमेंट फ्लाइंग क्लब, लखनऊ

ओरिएंट फ्लाइट स्कूल, चेन्नई

पुडुचेरी ठाकुर कॉलेज ऑफ़ एविएशन

आस्पिरेंट पायलट्स के लिए महत्त्वपूर्ण जानकारी

एक पायलट के तौर पर अपना करियर शुरू करने के लिए आप भारत के किसी प्रमुख ट्रेनिग इंस्टीट्यूट में सीधा एडमिशन ले सकते हैं बशर्ते, आप भारत की एविएशन इंडस्ट्री के मानकों के मुताबिक शारीरिक तौर पर पूरी तरह फिट हों और आपने एंट्रेंस एग्जाम पास कर लिया हो. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) नेशनल लेवल पर हरेक वर्ष आस्पिरेंट पायलट्स के लिए एंट्रेंस एग्जाम आयोजित करता है जिसे IGRUA एंट्रेंस टेस्ट के तौर पर जाना जाता है. इसी तरह, पायलट्स ATPL, इंस्टीट्यूशन्स एग्जाम्स भी दे सकते हैं.



भारत में पायलट्स के लिए प्रमुख जॉब प्रोफाइल्स

हमारे देश में पायलट्स के लिए निम्नलिखित प्रमुख जॉब प्रोफाइल्स उपलब्ध हैं:


कमर्शियल पायलट्स - पैसेंजर पायलट्स, कार्गो पायलट्स और एरोस्पोर्ट्स पायलट्स

मिलिट्री पायलट्स - एयरफोर्स पायलट्स, आर्मी पायलट्स और नेवी पायलट्स

प्राइवेट पायलट्स - प्राइवेट जेट्स/ हेलिकॉप्टर पायलट्स (कॉर्पोरेट/ पर्सनल नीड्स के मुताबिक)

इसके अलावा, हमारे देश में पायलट्स के लिए कुछ अन्य जॉब प्रोफाइल्स निम्नलिखित हैं:


को-पायलट

चीफ पायलट

कैप्टेन

फर्स्ट ऑफिसर

एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट

कम्यूटर पायलट

एयरलाइन पायलट

भारत में पायलट्स का सैलरी पैकेज

हमारे देश में पायलट्स के ट्रेनिंग सर्टिफिकेट्स और उड़ान के घंटों के आधार पर सैलरी पैकेज ऑफर किया जाता है. भारत में कमर्शियल पायलट्स को औसतन 02 लाख - 01 करोड़ रुपये का सालाना सैलरी पैकेज ऑफर किया जाता है. मिलिट्री पायलट्स को 07 लाख - 20 लाख रुपये का सैलरी पैकेज मिलता है और प्राइवेट पायलट्स को भी औसतन 02 लाख - 20 लाख का सैलरी पैकेज ऑफर किया जाता है.



भारत में पायलट्स के लिए टॉप रिक्रूटिंग कंपनीज़

हमारे देश में पायलट्स निम्नलिखित प्रमुख एविएशन कंपनीज़ में अप्लाई कर सकते हैं:  


सिविल एविएशन डिपार्टमेंट

इंडियन आर्म्ड फोर्सेज

इंडियन नेवी

एयर इंडिया

स्पाइस जेट

विस्तारा

एयर एशिया

इंडिगो

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड

स्काईवर्ल्ड चार्टर सर्विसेज

अन्य महत्त्वपूर्ण लिंक


ड्रोन पायलट: भारत में उपलब्ध कोर्स और करियर ऑप्शन्स


एस्ट्रोनॉमी: इंडियन स्पेस साइंस में हैं कई शानदार करियर ऑप्शन्स


एस्ट्रोफिजिक्स के फ्री ऑनलाइन कोर्सेज ज्वाइन करके बनें एस्ट्रो एक्सपर्ट

शनिवार, 26 जून 2021

प्राचीन भारत का इतिहास : चंद्रगुप्त मौर्य



प्राचीन भारत का इतिहास : चंद्रगुप्त मौर्य


➤मौर्य साम्राज्‍य का उदय


मौर्य साम्राज्‍य का प्रारंभ चंद्रगुप्‍त मौर्य द्वारा 321 ईसा पूर्व में मगध से हुआ। विशाखादत्‍त द्वारा रचित मुद्राराक्षस में चाणक्‍य की मदद से चंद्रगुप्‍त मौर्य के उदय का सुदंरता से चित्रण किया गया है। चंद्रगुप्‍त मौर्य जैनधर्म का अनुयायी था। पाटलिपुत्र, आधुनिक पटना मौर्य साम्राज्‍य की राजधानी थी।


पडीफ डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें


➤मौर्य साम्राज्‍य का विस्‍तार


मौर्य साम्राज्‍य उस समय के सबसे बड़े साम्राज्‍यों में से एक था और 5,000,000 वर्ग कि.मी से भी अधिक क्षेत्रफल में विस्‍तारित था। उत्‍तर-पूर्व भारत के हिस्‍सों, केरल और तमिलनाडु को छोड़कर मौर्यों ने शेष भारतीय उप-महाद्वीपों पर शासन किया था।



➤राजव्‍यवस्‍था


1. मेगस्‍थनीज़ की पुस्‍तक इंडिका और अर्थशास्‍त्र (कौटिल्‍य द्वारा लिखित) के विवरणों में मौर्य प्रशासन, समाज और अर्थव्‍यवस्‍था का विस्‍तृत वर्णन किया गया है।


2. साम्राज्‍य प्रांतों में विभाजित था, जिसका शासन राजकुमारों के हाथ में था। इसके साथ, 12 विभागों, सैन्‍य बलों में छह शाखाओं का भी उल्‍लेख किया गया है। चंद्रगुप्‍त ने एक सुव्‍यवस्थित प्रशासनिक तंत्र को स्‍थापित किया और एक ठोस वित्‍तीय आधार प्रदान किया।


➤बिंदुसार (298 – 273 ईसापूर्व)


ग्रीक में इसे अमित्रघात के नाम से जाना जाता था और यह आजीवक सम्‍प्रदाय का अनुयायी था।


➤अशोक


1. अशोक 273 ईसापूर्व में सिंहासन पर बैठा और 232 ईसापूर्व तक शासन किया। इसे ‘देवप्रिय प्रियदर्शी’ के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ था, ईश्‍वर का प्‍यारा।


2. अशोक ने 261 ईसापूर्व में कलिंग का युद्ध लड़ा। कलिंग आधुनिक उड़ीसा में है।


3. अशोक के शिलालेखों को सबसे पहले जेम्‍स प्रिंसेप ने पढ़ा था।


4. कलिंग के युद्ध के पश्‍चात, अशोक बौद्ध हो गया, युद्ध के आंतक से विचलित होकर, उसने बेरीघोष की जगह धम्‍मघोष मार्ग अपनाया।


5. अशोक को बौद्ध धर्म का ज्ञान बुद्ध के एक शिष्‍य उपगुप्‍त या निग्रोध ने दिया था।


6. बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अशोक ने धर्ममहामात्रों को नियुक्‍त किया।


➤अशोक के शिलालेख


1. अशोक के शिलालेखों में राज आज्ञा थी जिसके जरिए वह जनता से सीधे संपर्क करने में सक्षम था। ये शिलालेख और स्‍तंभलेख थे जिन्‍हें दीर्घ और लघु में बांटा गया था।


2. अशोक के 14 मुख्‍य शिलालेख धर्म सिद्धांत के बारे में बताते हैं।


3. कलिंग शिलालेख कलिंग युद्ध के बाद प्रशासन के सिद्धांत की व्‍याख्‍या करता है। अपने कलिंग शिलालेख में, इसने जिक्र किया है ‘सभी मनुष्‍य मेरे बच्‍चे हैं’।


4. अशोक के मुख्‍य शिलालेख XII में कलिंग युद्ध का जिक्र किया गया है।


5. ‘अशोक’ का सर्वप्रथम उल्‍लेख केवल मास्‍की लघु शिलालेख में हुआ है।



➤अशोक और बौद्ध धर्म


• अशोक ने 250 ईसापूर्व में अपनी राजधानी पाटलिपुत्र में मोगलीपुत्‍त तिस्‍स की अध्‍यक्षता में तृतीय बौद्ध संगति का आयोजन किया।


• उसने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेन्‍द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।


• अशोक ने श्रीलंका और नेपाल में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। इसे बौद्ध धर्म के कोंसटेटाइन कहा जाता है।


• श्रीलंका के शासक देवमप्रिय तिस्‍स अशोक के प्रथम बौद्ध धर्म धर्मांतरण थे।


• अशोक की धम्‍म नीति का व्‍यापक उद्देश्‍य सामाजिक व्‍यवस्‍था को बनाए रखना था।


• अशोक ने 40 वर्षों तक शासन किया और 232 ईसापूर्व में इसकी मृत्‍यु हो गई।


➤मौर्य प्रशासन


अत्‍यधिक केन्‍द्रीयकृत प्रशासनिक ढांचा। चाणक्‍य ने प्रशासन में सप्‍तांग सिद्धांत के 7 तत्‍वों का जिक्र किया है। राजा को मंत्रिपरिषद द्वारा सलाह दी जाती थी। विभिन्‍न प्रशासनिक क्रियाकलापों के लिए महत्‍वपूर्ण अधिकारी नियुक्‍त किए जाते थे।


प्रशासन चार इकाईयों में विभाजित था


• चक्र या प्रांत


• अहर या जिला


• संघ्राहाना या गांवों का समूह


• गांव


नगरीय प्रशासन के अध्‍यक्षता करने वाले नगरक का उल्‍लेख अर्थशास्‍त्र में भी पाया जाता था।


➤मौर्य कला


1) शाही कला – राजमहल, स्‍तंभ, गुफाएं, स्‍तूप आदि


2) लोकप्रिय कला – चित्रण मूर्तियां, टेराकोटा वस्‍तुएं आदि


भारतीय गणराज्‍य के प्रतीक को अशोक स्‍तंभ के चार शेरों से लिया गया है, जो सारनाथ में स्थित है। सांची से अन्‍य चार शेर, रामपुरवा और लौरिया नन्‍दनगढ़ से एक शेर और रामपुरवा से एक बैल और धौली में नक्‍काशीदार हाथी पाए जाते हैं।


मौर्यों ने व्‍यापक स्‍तर पर पत्‍थर राजगिरी की शुरुआत की थी। इन्‍होंने चट्टानों को खोदकर गुफाएं बनाने की शुरूआत की और बुद्ध और बोधिसत्‍व के पुरावशेष संग्रहित करने के लिए स्‍तूपों का निर्माण किया जिसका बाद में गुप्‍त वंश द्वारा विस्‍तार किया गया था।



➤पतन का कारण


• अत्‍यधिक केन्‍द्रीयकृत मौर्य प्रशासन


• अशोक की मृत्‍यु के बाद विभाजन ने साम्राज्‍य की एकता में फूट डाल दी


• उत्‍तरवर्ती कमजोर मौर्य शासक भी इस साम्राज्‍य के पतन के कारण थे